बाराबंकी। सरकारी व निजी जमीनों से अवैध कब्जा मुक्त कराने का योगी सरकार का अभियान राजधानी के सबसे पास जिले में सफल होता नहीं दिख रहा। गांवों में तालाबों व सरकारी जमीनों पर गरीबों से अधिकतर कब्जे हटाकर अधिकारी अपनी पीठ भले थपथपा रहे हो। पर लखनऊ की सीमा वाली सदर व फतेहपुर तहसील की करोड़ों कीमत वाली जमीनों पर काबिज प्रापर्टी डीलरों पर कार्रवाई करने से अधिकारियों के हाथ-पैर फूल रहे हैं। दावा जरूर है। जिले में 19 भूमाफिया चिह्नित कर 12 पर केस दर्ज कराया गया। पर इसमें सरकारी जमीन पर प्लाटिंग व सड़क बनाने वाला एक भी भूमाफिया शामिल नही है। जिला मुख्यालय व तहसीलों को मिलाकर गठित 7 एंटी भू-माफिया टीमों ने 1059.33 हेक्टेयर भूमि कब्जा मुक्त कराने का दावा कर रही है। किन्तु असलियत यह है कि राजस्व कर्मी कागजों पर जमीनों की पैमाइश कर आंकड़े दुरुस्त कर लिए पर अधिकांश जगहों पर दबंग अभी भी अपना कब्जा जमाए हुए है।
विभागीय आंकड़ों पर नजर डाले तो जिले में एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स के गठन के बाद छह तहसील व जिला प्रशासन की टीम अब तक 19 भूमाफिया चिह्नित किए है। जिसमें से 12 भूमाफियाओं पर केस दर्ज कराने की कार्रवाई की। जिनमें नवाबगंज तहसील के 7, सिरौलीगौसपुर में 3 तथा हैदरगढ़ के व रामनगर के 1-1 भू-माफिया पर कार्रवाई की गई है। जबकि, फतेहपुर व रामसनेहीघाट तहसील प्रशासन को अभी तक एक भी भूमाफिया ढूंढे नही मिला। प्रशासन की माने तो जिले भर में 1059.33 हेक्टेयर भूमि कब्जा मुक्त कराई गई। इसको लेकर जिले के विभिन्न तहसीलों में 710 वाद धारा 67 के तहत दाखिल किए गए है।
देवा व कुर्सी क्षेत्र में बेशकीमती जमीनों पर काबिज आरपी ग्रीन सिटी, अब्दुल्ला गोल्ड सिटी, प्रेमा ग्रीन सिटी, सिगमा ग्रीन सिटी व महिपल्स ग्रीन सिटी व शहर के आस-पास कई सफेदपोशों की प्लाटिंग कर सरकारी जमीनों पर कब्जा कर रखा था। अवैध निर्माण हटाने गई राजस्व टीम ने कई हेक्टेयर भूमि पैमाइश में इन लोगों के कब्जे में पाई गई थी। कागजों पर मुक्त भी दिखा दिया गया। पर वन विभागों की जमीनों पर जहां पेड़ लगने चाहिए वहां आज भी सड़कें बनी है। यही नही यह ऊंची पहुंच वाले प्रापर्टी डीलरों पर कार्रवाई की बजाय तहसील व कलेक्ट्रेट में इनकी आवभगत होती है। यही कारण है कि अवैध कब्जा पाए जाने के बाद भी इन लोगों पर कार्रवाई करना तो दूर भू-माफिया की सूची में नाम तक नही दर्ज किया गया है। सदर तहसील के बस्ती गांव में ही योगेंद्र प्रताप सिंह ने जमीन खरीदी पर अभी तक इन्हें कब्जा नहीं मिल पाया। दोषियों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया फिर भी न्याय के लिए भटक रहे है। ऐसे कई मामले सरकारी के अलावा निजी जमीनों के लंबित है। जिसका निस्तारण करने में एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स कुछ कर नहीं पा रही है।
रातों-रात हुआ सरकारी जमीनों पर निर्माण कार्य
शहर के नाका सतरिख से हैदरगढ़ जाने वाले मार्ग पर सरकारी भूमि पर रातों-रात निर्माण कार्य हुआ। अवैध निर्माण ढहाया गया पर दोबारा कब्जा कर लिया गया। हाल में ही चौपुला के पास एक प्लाटिंग के मध्य में करीब एक बीघे सरकारी जमीन प्रशासन ने चिह्नित की। इसी प्रकार तिंदोला व खसपरिया के पास भी भूमाफियाओं द्वारा सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे के मामले जगजाहिर है। यही नही रेठ नदी को पाटकर सैकड़ों बीघा जमीन प्लाटिंग कर बेच दी गयी है।
शासन के निर्देशों पर एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स का गठन कर प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। भविष्य में भी और प्रभावी ढंग से सख्ती के साथ शासन के निर्देशो का अनुपालन कर कार्रवाई की जाएगी। - अनिल कुमार सिंह, एडीएम, वित्त एवं राजस्व बाराबंकी