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Barabanki News: कागजों में सौ फीसदी टीकाकरण, गांव में नहीं पहुंची टीम

Tue, 11 Aug 2026 01:17 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
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बाराबंकी। पशुपालन विभाग भले ही जिले में शत-प्रतिशत पशुओं के टीकाकरण (एचएस व एफएमडी) का दावा कर अपनी पीठ थपथपा रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत इसकी कुछ और कहानी बयां कर रही है। कागजों में जिले के लाखों बेजुबानों को सुरक्षा कवच पहना दिया गया है, पर गांवों की पगडंडियों पर पड़ताल करते ही इन दावों की पोल खुलती दिखी।
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कई गांवों में टीकाकरण के लिए टीम पहुंची ही नहीं, तो कहीं सिर्फ चौराहे पर दो-चार मवेशियों को सुई लगाकर अभियान का कोटा पूरा कर लिया गया। आलम यह है कि पशुपालक अपने मवेशियों को खुरपका-मुंहपका और गलाघोंटू जैसी जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए निजी डॉक्टरों से महंगे दाम पर टीकाकरण कराने को विवश हैं।
केस एक-
पशु चिकित्सालय कैसरगंज के क्षेत्र में आने वाले नसीरवापुर में घर के बाहर खूंटे से बंधी भैंस के पास खड़े पशुपालक मुन्नालाल का दर्द छलक पड़ा। उन्होंने बताया टीका मुफ्त मिलने का दावा किया जाता है, पर हमारे दरवाजे पर कोई नहीं आया। मजबूरी में 500 रुपये खर्च करके प्राइवेट डॉक्टर को बुलाना पड़ा।
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केस दो-
सिद्धौर ब्लॉक के सरांयमीर गांव के मुहाने पर बैठे पशुपालक अमीन ने बताया कि विभाग के कागजी आंकड़ों और धरातल में जमीन-आसमान का अंतर है। बताया कि उनके पास चार दुधारू भैंस हैं, लेकिन किसी को भी इस सत्र में टीका नहीं लगा है। विभाग के रजिस्टर में इस गांव का रिपोर्ट कार्ड भले ही शत-प्रतिशत दर्ज हो, पर असल में आधे से अधिक पशु बिना टीकाकरण के घूम रहे हैं।
केस तीन
सूरतगंज पशु चिकित्सालय क्षेत्र में आने वाले मधवा जलालपुर गांव में टीकाकरण के नाम पर रस्म अदायगी देखने को मिली। पशुपालक ओम प्रकाश द्विवेदी ने बताया कि उनके पास दो भैंस है। लेकिन किसी को भी टीका नहीं लगाया गया। टीम घर-घर जाने की बात तो दूर गांव तक भी नहीं आई। रायपुर के शंकर यादव , हेतमापुर के कुंवारे का भी कहना है कि उनके गांव में भी न तो टीकाकरण हुआ न ही पशुपालन विभाग का कोई कर्मचारी आया।
केस- चार
मसौली ब्लॉक के बड़ागांव निवासी पशु पालक वीरेंद्र का कहना है कि उनके पास आठ मवेशी हैं। किसी को कोई टीका नहीं लगा है। देवकलिया के प्रेमचंद्र व कन्हैया ने बताया कि पिछले साल भी टीकाकरण न होने से उनकी गाय गंभीर रूप से बीमार हो गई थी। इस बार भी पूरा अभियान बीत जाने के कगार पर है, पर गांव में वैक्सिनेटर की आमद नहीं हुई है।
दावों के जाल में उलझी जमीनी हकीकत
पशुपालन विभाग का दावा शत-प्रतिशत टीकाकरण का है, जबकि धरातल पर महज 40 से 50 फीसदी पशुओं को ही टीका लग सका है। नियमानुसार टीम को घर-घर जाकर टीकाकरण करना था, लेकिन अधिकांश गांवों में चौराहे या मुख्य मोड़ पर ही खानापूर्ति पूरी कर ली। पशुओं के कानों में पुराने टैग लटक रहे हैं, पर इस सत्र के टीके का कोई नया रिकॉर्ड उनमें दर्ज नहीं है।
वर्जन
जिले में पशुओं के शत-प्रतिशत टीकाकरण का अभियान पूरी गंभीरता के साथ चलाया जा रहा है। सभी टीमों को स्पष्ट निर्देश हैं कि वे घर-घर जाकर टीकाकरण और टैगिंग सुनिश्चित करें। यदि किसी गांव में टीम के न पहुंचने या चौराहे पर ही खानापूर्ति करने की शिकायत है, तो इसकी जांच करा कर दोषियों को चिह्नित कर कार्रवाई के घेरे में लाया जाएगा।
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डॉ. विनोद कुमार यादव, सीवीओ
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