बांदा। मां-पत्नी और बच्चों को कमरे में कैद कर युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजन आत्महत्या की वजह लॉकडाउन में काम ठप होने पर आर्थिक संकट बता रहे हैं। उस पर करीब तीन लाख रुपये का निजी कर्ज भी बताया गया है। ग्राम प्रधान ने भी स्वीकारा कि मृतक के परिवार की आर्थिक स्थिति खराब है। उधर, पैलानी एसडीएम ने आत्महत्या की वजह घरेलू कलह बताई।
घटना पैलानी थाना क्षेत्र के खरेई गांव के उसरा डेरा की है। यहां आशाराम (36) पुत्र बाबूलाल ने शुक्रवार को दोपहर घर के कच्चे कमरे में रस्सी से फांसी लगाकर जान दे दी। परिजनों की सूचना पर पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया है।
भाई पंकज ने बताया कि घटना के वक्त वह बाहर था। आशाराम ने मां भूरी, पत्नी मालती और पुत्र और तीन पुत्रियों को कमरे में बंद कर ताला लगा दिया और दूसरे कच्चे कमरे में खुद फंदे पर झूल गया। शोर सुनकर पड़ोसियों ने सभी को बाहर निकाला। आशाराम के नाम मात्र दो बीघा जमीन है। ट्रैक्टर से खेत की जुताई करके परिवार पालता था। लोगों से तीन लाख रुपये कर्ज लेकर उसने ट्रैक्टर खरीदा था।
कुछ किस्तें अदा कर दी, लेकिन डेढ़ साल पहले पिता को कैंसर हो जाने पर वह किस्तें नहीं भर सका। इसकी अदायगी और लॉकडाउन में काम न मिलने का तनाव था।
उधर, ग्राम प्रधान महावीर निषाद ने बताया कि आशाराम के घर की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। पिता के इलाज में उसने सब कुछ गंवा दिया। पैलानी एसडीएम रामकुमार का कहना है कि उन्होंने लेखपाल से जांच कराई है। लॉकडाउन से आर्थिक संकट और कर्ज की बात परिजनों ने नहीं बताई। घरेलू झगड़े में आत्महत्या करना बताया गया है।