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Banda News: सात काले तिल समर्पित करके भी पा सकते है पितरों की कृपा

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बांदा/अतर्रा। पितृपक्ष बुधवार से शुरू हो रहा है। इस दौरान लोग अपने पितरों का तर्पण करेंगे। आगामी 2 अक्टूबर तक शुभ कार्य नहीं होंगे। इस दौरान लोग अपने पितरों का तर्पण करने के साथ ही श्राद्ध और गया आदि करेंगे। अतर्रा कस्बे के लखन कालोनी निवासी ज्योतिषाचार्य शिवदत्त त्रिपाठी ने कहा कि सात काले तिल को समर्पित करने से भी पितरों की कृपा प्राप्त की जा सकती है। ज्योतिषाचार्य ने बताया कि हिंदू धर्म में पितरों का खास महत्व है। मान्यता है कि पितृपक्ष में पितरों को तर्पण देने सहित श्रद्धा कर्म करने से उन्हें मोक्ष प्राप्त होता है। बताया घर का बड़ा पुत्र पूर्वजों का तर्पण कर श्राद्ध करता है। तर्पण और पिंडदान से पूर्वजों की कृपा बरसती है। बताया कि बुधवार से दो अक्टूबर गांधी जयंती तक पितृपक्ष के दौरान कोई शुभ कार्य नहीं होते और खरीददारी नहीं होती है। शास्त्रों में इसके पीछे कई कारण बताए गए हैं, लेकिन मान्यता है कि करुण और श्रृंगार का समन्वय नहीं हो सकता है, इसलिए पितृ पक्ष में सिर्फ लोग पितरों का स्मरण व पूजन अर्चन करते हैं और शुभ कार्य रोक दिए जाते हैं। बताया कि पुत्र, पौत्र, भतीजा, भांजा कोई भी श्रद्ध कर सकता है। कोआ, कुत्ता और गाय को राम के प्रतीक माना गया है। कौआ भविष्य वक्ता और कुत्ते को अनिष्ट का संकेतक कहा गया है। इसलिए श्रद्ध में इनको भी भोज दिया जाता है।
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नवाब टैंक और केन नदी में लगेगा जमावड़ा
बुधवार से पितृपक्ष शुरू हो रहा है। इसके चलते पितरों का तर्पण करने वालों का शहर के नवाब टैंक और केन नदी के विभिन्न घाटों में जमावड़ा लगेगा। काफी हद तक लोग घरों से ही पितरों का तर्पण करते हैं। जबकि अधिकतर लोग नदी, सरोवरों में पहुंचकर स्नान करने के बाद पितरों का तर्पण करते हैं। पितरों का तर्पण करने के साथ ही श्रद्धालु श्राद्ध और गया कर्मकांड भी करते हैं।
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