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Banda News: खतरें के निशान से तीन मीटर ऊपर यमुना, 24 से अधिक गांव घिरे

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बांदा-बहराइच मार्ग पर भरा पानी।  - फोटो : संवाद
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बांदा। यमुना और केन के उफान से लोगों की सांसें अटकने लगी हैं। लोगों को 2005 की विनाशकारी बाढ़ का मंजर याद आने लगा है, जिसे लोग दो दशक में भी भुला नहीं पाए हैं। यमुना खतरे के निशान से तीन मीटर ऊपर पहुंच गई हैं। एक ही रात में डेढ़ मीटर जलस्तर बढ़ने से 24 से अधिक गांवों में पानी घुस गया है। 24 से अधिक गांव पानी में घिर गए हैं। सैकड़ों कच्चे मकान पानी में समा गए। प्रशासन ने बचाव और राहत कार्य शुरू कर दिया। पीड़ितों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
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चिल्ला-तारा के बीच नेशनल हाइवे, ललौली सड़क में पानी भर जाने से आवागमन बंद हो गया है। पुलिस वाहन चालकों को दूसरे रास्ते से जाने की सलाह दे रही है। कई संपर्क मार्गों के पानी में डूब जाने से एक गांव से दूसरे गांव का संपर्क टूट गया है। उधर, यमुना ने केन का पानी लेना बंद कर दिया है। ऐसे में केन का जलस्तर भी तेजी के साथ बढ़ने लगा है। हालांकि वह खतरे के निशान से दो मीटर नीचे है।
जिलाधिकारी जे.रीभा, एसडीएम पैलानी, अपर पुलिस अधीक्षक ने यमुना नदी के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण कर बचाव एवं राहत कार्यो का जायजा लिया।

चलने लगीं नाव, सुरक्षित स्थानों पर जा रहे लोग
पैलानी। यमुना का पानी पैलानी के शंकर पुरवा गांव में घुस आया है। पंचायत भवन के सामने 10 से 12 फीट पानी भरा है। नाव के जरिए लोग इस पार से उस पार जा रहे है। शंकर पुरवा के लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा रहा है। बीमार, गर्भवती महिलाओं को मोटर वोट से बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान या अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। पैलानी डेरा, मरझा व सिंधनकला संपर्क मार्ग, जसपुरा के तरौहा सड़क में पानी भर जाने से कई गांवों का जनपद व तहसील मुख्यालय से संपर्क टूट गया है।
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शुक्रवार को डीएम जे. रीभा व जल शक्ति राज्य मंत्री रामकेश निषाद ने प्रभावित गांव शंकर पुरवा का भ्रमण कर बचाव एवं राहत कार्यो का जायजा लिया। कहा कि जिन संपर्क मार्गो में पानी भर गया है। वहां बैरीकेडिंग कर पुलिस की ड्यूटी लगाए और वाहनों को रोका जाए। बचाव व राहत कार्य में लगे लोगों व नाविकों को सपोर्ट लाइफ जैकेट उपलब्ध कराने को कहा। स्वास्थ्य विभाग को कैंप लगाकर बीमारों का इलाज करने के निर्देश दिए। कहा कि बचाव राहत कार्य में कोई कमी न रहे। घर बार छोड़ चुके लोगों तक राहत किट व खाना आदि पहुंचाया जाए।

गढ़ी टीला में मवेशी व गृहस्थी लेकर पहुंचे ग्रामीण
जसपुरा। बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोग अपनी गृहस्थी व मवेशी लेकर सुरक्षित गढ़ी टीला की ओर जा रहे हैं। नांदादेव,पड़ोहरा, मड़ौली, अमारा सहित कई मजरे, कुटी,बरेहटा,शिवरामपुर, डिप्पा डेरा,फकिरा डेरा,नया डेरा, हजारी डेरा,बंजारी डेर आदि टापू बन गए हैं। इन गांवों में बिजली के ट्रांसफार्मर फुंक गए हैं, जिससे बिजली,पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह ठप हो गई हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि कोई बीमार हो जाए तो इलाज तक की सुविधा उपलब्ध नहीं है। गौरीकलां रपटा जलमग्न है और नाव से आवागमन हो रहा है। गौरीकला का रपटा पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है। सड़क पर करीब छह फीट पानी बह रहा है, जिस पर नाव के जरिए आना-जाना किया जा रहा है। गड़रिया गांव के रपटे पर तो स्थिति और भी भयावह है, जहां करीब 12 फीट ऊंचाई तक पानी रोड के ऊपर से बह रहा है। जसपुरा स्टेडियम में पानी भर गया है। जसपुरा का मजरा तरौड़ा पूरी तरह नदी से घिर चुका है। यहां सड़क पर करीब 12 फीट पानी बह रहा है। यहां आवागमन पूरी तरह बंद है। जसपुरा-झंझरीपुरवा का मार्ग भी जलमग्न हो गया है।

सैकड़ों बीघा फसलें बर्बाद, किसान बेहाल
नांदादेव, भाथा, गौरीकला, अमारा और जसपुरा के किसानों ने बताया कि सैकड़ों बीघा में खड़ी अरहर,तिल और ज्वार की फसलें पानी में समा गई हैं। किसानों ने प्रशासन से मुआवजे की मांग की है। एसडीएम अंकित वर्मा ने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में राजस्व विभाग की टीमें तैनात कर दी गई हैं और लगातार निगरानी की जा रही है। थाना प्रभारी अनिल कुमार ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल मुस्तैद है। नांदादेव ग्राम प्रधान रोहित निषाद ने बताया कि गांव के आठ मकानों में पानी घुस चुका है और सैकड़ों बीघा फसल बर्बाद हो गई है। वहीं प्रमोद निषाद, कल्लू सिंह, रमाशंकर, तेज नारायण, सभाजीत निषाद व जगत पाल निषाद सहित कई किसानों ने बताया कि बाढ़ से उन्हें भारी नुकसान हुआ है। राजस्व निरीक्षक रामकिशोर कुशवाहा, लेखपाल शिवनरेश व यशवंत पाल लगातार क्षेत्र में निगरानी कर रहे हैं।
ऊसरा नाले का पुल डूबा, आवागमन बंद
तिंदवारी। यमुना के पानी से अमलीकौर, बेंदा, जौहरपुर, लोहारी गांव में पानी भर गया है। उसरा नाले के ऊपर से तीन फीट ऊपर पानी बह रहा है। जलालपुर में जल जीवन मिशन के फिल्टर प्लांट पानी में डूब गया है। एसडीएम सदर नमन मेहता ने प्रभावित गांवों का भ्रमण कर बचाव एवं राहत कार्यो का जायजा लिया। लोहारी के ग्रामीणों ने बताया कि पानी मकान के अंदर तो नहीं गया, लेकिन बाहर पानी भरा होने से कच्चे मकान धडाम-धड़ाम होकर गिर रहे हैं। अमलीकौर प्रधान प्रतिनिधि देशराज सिंह ने बताया कि फसल का बहुत बड़ा नुकसान हुआ है।

जान जोखिम में डाल पार कर रहे रपटा
नरैनी। केन व सहयोगी नदी रंज के उफनाने व बारिश से कुरुहूं का रपटा पानी में डूब गया है। वाहन चालक जान जोखिम में डालकर रपटे को पार कर रहे है। रपटे के ऊपर से दो फिट पानी बह रहा है। राजादाढ़ी, मवासी का पुरवा आदि गांवों में पानी भर जाने से आवागमन ठप हो गया है। लोग घरों के अंदर फंसकर रह गए है। कुलदीप त्रिपाठी, विवेक व अशोक ठाकुर ने बताया कि नदी व बारिश के पानी से गांव-गांव टापू नजर आने लगे है। सैकड़ों एकड़ खरीफ की फसल बर्बाद हो गई है।

दस से ज्यादा गांवों का आवागमन ठप
बबेरू। यमुना व बाकल नदी का जलस्तर बढ़ने से मझीवा, केवटरा, बदौली, बधैला, सिमौनी, टोला कला, समगरा, जलालपुर, बाकल व मरका के रपटों में दो फिट ऊपर से पानी बह रहा है। जिला प्रशासन ने लोगों के आवागमन के लिए नावें लगाई हैं। सिमौनी व टोलाकला के पुल के ऊपर से पानी बहने से लोगों को बबेरू आने जाने के लिए दूसरे रास्ते से घूमकर जा रहे है। बघैला गांव में तीन से चार फिट पानी भर गया है। प्राथमिक विद्यालय में पानी जाने से बाढ़ पीड़ितों को दूर जूनियर स्कूल में शरण लेनी पड़ रही है।

सुरक्षित स्थान पर पलायन
कमासिन। यमुना का पानी छह से से अधिक गांवों में घुस गया है। लखनपुर में दो से तीन फिट पानी भरा है। दादों मार्ग से जाने वाला सिंह मोहिनी देवी मंदिर मार्ग में पांच से छह फिट पानी भरा होने से आवागमन ठप हो गया है। ग्रामीण थोडा बहुत गृहस्थी का सामान लेकर पशुओं सहित सुरक्षित स्थानों के लिए पलायन कर रहे है।
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केन व यमुना नदी का जलस्तर (मीटर में)
नदी खतरे का निशान जलस्तर
केन 104 102
यमुना 100 103
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