बांदा। जिले की दो तहसील क्षेत्रों में यमुना और केन की बाढ़ का कहर जारी है। बाढ़ प्रभावित लगभग 35 गांवों के ज्यादातर लोग घर छोड़कर सरकारी स्कूलों या ऊंचाई वाले स्थानों पर पॉलिथीन की झोपड़ी बनाकर शरण लिए हैं। यमुना खतरे के निशान से करीब पौने तीन मीटर ऊपर है। शनिवार की शाम केंद्रीय जल आयोग द्वारा जारी बाढ़ बुलेटिन में यमुना का जलस्तर घटने का पूर्वानुमान बताया गया है, जो एक सेंटीमीटर प्रति घंटा घटेगी। उधर, केन नदी के जलस्तर में दो मीटर की कमी आई है। गंगऊ और बरियारपुर बांधों से डिस्चार्ज काफी घट गया है।
शनिवार को यमुना और केन की बाढ़ से प्रभावित पैलानी तहसील के लगभग 35 गांवों में पानी भरा रहा। कई कच्चे मकान धराशायी हो गए। पक्के मकान वालों ने अपना सामान ऊपरी मंजिल पर रख लिया है। तमाम ग्रामीणों ने घर छोड़कर गांव के स्कूल भवन या ऊंचे स्थानों पर खुले आसमान तले पॉलिथीन लगाकर शरण ले ली है। ग्रामीण अपने साथ पशु भी रखे हैं। इन बाढ़ पीड़ितों को अभी जरूरत का राशन, मिट्टी का तेल, दवाएं आदि नहीं मिल रहे हैं।
हालांकि प्रशासन ने राहत कार्यों की शुरुआत कर दी है। शनिवार को एडीएम संतोष बहादुर सिंह, अपर एसपी एलबीके पाल, एसडीएम पैलानी मंसूर अहमद, तहसीलदार राजीव निगम आदि ने पुलिस की स्टीमर से बाढ़ से घिरे कई गांवों का जायजा लिया। उधर, क्षेत्रीय विधायक बृजेश प्रजापति ने भी तारा, खजुरी, चिल्ला आदि गांवों में पैदल और नाव के जरिए जायजा लिया। बाढ़ पीड़ितों को लाई-चना और सिर छिपाने को आशियाना बनाने के लिए पन्नी बांटी। उनके साथ एसडीएम मंसूर अहमद, सीएमओ डॉ. संतोष कुमार और चिल्ला थाना इंस्पेक्टर तथा पैलानी नायब तहसीलदार भी थे। शनिवार को शाम केंद्रीय जल आयोग के अधिशासी अभियंता मनोज कुमार द्वारा जारी पूर्वानुमान बुलेटिन में कहा गया है कि यमुना नदी के रविवार को सुबह 9 बजे 102.37 मीटर पैमाने पर आ जाने का अनुमान है, यानी रातभर में 16 सेंटीमीटर जल स्तर घटेगा।
केन का पानी घटने से मिली राहत
खप्टिहा कलां। केन नदी की बाढ़ में लगाम लगने से पैलानी कस्बा सहित इससे प्रभावित गांवों में ग्रामीणों ने राहत महसूस की है। शंकर पुरवा, सेमरा डेरा में केन का पानी भरा हुआ है। यहां दर्जनों निषाद बिरादरी के लोग पलायन कर गए हैं। उनके घरों में पानी भर गया है। यह गढ़ी टीला में खुले आसमान तले शरण लिए हुए हैं। सेमरा डेरा में लेखपाल कृष्णचंद्र ने बाढ़ पीड़ितों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने के लिए लगातार लगे हुए हैं। चिल्ला प्रतिनिधि के मुताबिक खजुरी व तारा गांवों में अभी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। चिल्ला कस्बे में दुकानों तक पानी भरा हुआ है।
खुले में रहने को मजबूर ग्रामीण
कमासिन। यमुना और बागै नदियों की बाढ़ ने इस क्षेत्र के कई गांवों में बर्बादी मचा रखी है। अछरील, कुचौली और इटर्रा गांव सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इन गांवों में आबादी तक पानी भर गया है। दो दर्जन से ज्यादा परिवार खुले आसमान तले डेरा डाले हुए हैं। शनिवार को एसडीएम महेंद्र प्रताप और तहसीलदार विपिन कुमार ने अछरील में बाढ़ पीड़ितों को लाई और चना बांटा। बागै, पैसुनी व रवाय जैसी छोटी नदियों के उफान से भी यह गांव प्रभावित हैं। लगभग दो दर्जन कच्चे मकान ध्वस्त हो गए हैं।
बांधों से एक लाख क्यूसेक पानी घटा
बांदा। मध्य प्रदेश के जल संग्रह क्षेत्रों में बारिश में आई कमी से गंगऊ और बरियारपुर बांधों में बाढ़ भी काफी कम हो गई है। इन बांधों से केन नदी में डिस्चार्ज हो रहे पानी में 24 घंटे के दौरान करीब एक लाख क्यूसेक पानी की कमी आई है। शनिवार को गंगऊ से 69,884 और बरियारपुर बांध से 71,493 क्यूसेक पानी केन नदी में डिस्चार्ज हो रहा था, जबकि शुक्रवार को इन बांधों से 1.70 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हो रहा था। बांधों के डिस्चार्ज में कमी से केन नदी का जलस्तर भी घटने लगा है। शुक्रवार की रात खतरे के निशान तक पहुंचने के बाद शनिवार को सुबह से यह घटने लगी। लगभग दो मीटर कमी के साथ 102 मीटर पर आ गई। आगे भी इसके घटते रहने का पूर्वानुमान है।
चित्रकूटधाम मंडल के 10 बांधों में हुई बारिश
बांदा। बीते 24 घंटे के दौरान चित्रकूटधाम मंडल के 13 में से 10 बांधों में बारिश हुई है। सबसे ज्यादा 55 मिलीमीटर पानी गुंता बांध (चित्रकूट) में बरसा है। गंगऊ (छतरपुर) में 51 मिमी, रनगवां में 20, बरियारपुर में 10, ओहन में 21, बरुआ बांध में 34, अर्जुन (महोबा) बांध में 10, चंद्रावल (महोबा) में 5, मझगवां (महोबा) बांध में 15, उर्मिल (महोबा) बांध में 10 और रसिन (चित्रकूट) बांध में 35 मिलीमीटर बारिश हुई है। उधर, बांदा में 19.20 मिलीमीटर, चित्रकूट में 6 मिलीमीटर और महोबा में दो मिलीमीटर बारिश बताई गई है। शनिवार को शाम भी घने बादलों के साथ चित्रकूटधाम मंडल के कई इलाकों में बारिश होती रही। यह देर रात तक जारी थी।
नाले भी उफान पर
बांदा। बारिश से नाले भी उफान पर हैं। सदर तहसील के लोहारी गांव में शनिवार को उफनाए सैमरी नाले से गांव के अंदर पानी दाखिल हो गया। मौके पर पहुंचे सदर तहसीलदार अवधेश कुमार निगम ने बताया कि दो परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया है। लोहारी और माचा गांवों में खेत भी जलमग्न है। लेखपालों से नुकसान का सर्वे कराया जा रप्तहा है। ब्यूरो
पुलिस स्टीमर में एडीएम, एएसपी व एसडीएम।- फोटो : BANDA
बाढ़ से बचाने के लिए पेड़ पर रखी गई गृहस्थी।- फोटो : BANDA
बाढ़ प्रभावित इलाकों के मरीजों की जांच करती स्वास्थ्य विभाग की टीम।- फोटो : BANDA
नाव से सुरक्षित स्थानों पर जाते बाढ़ प्रभावित।- फोटो : BANDA
बाढ़ पीड़ितों को पॉलिथिन देते विधायक बृजेश प्रजापति।- फोटो : BANDA