बांदा। कई दिनों तक तबाही मचाने के बाद यमुना और केन नदियां अब सिमटने लगी हैं। बीते 24 घंटों के दौरान दोनों नदियों के जल स्तर में लगभग 2-2 मीटर की कमी आई है। हालांकि अभी भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगभग तीन दर्जन गांवों में परेशानियां कम नहीं हुईं। पीड़ित परिवार ऊंचे स्थानों पर खुले आसमान तले या सरकारी भवनों में पनाह लिए हुए हैं। प्रशासन की ओर से राशन और दवाओं की व्यवस्था की जा रही है। पानी से खाली हुए स्थानों पर दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है।
पैलानी, चिल्ला, बबेरू, कमासिन आदि क्षेत्रों में पिछले पांच दिनों से उफान पर रही यमुना नदी ने दर्जनों घरों को धराशाई कर दिया। कई हजार हेक्टेयर की खेती डूब गई। किसानों को भारी चपत लगी है। हालांकि जिलाधिकारी हीरा लाल के निर्देश पर राजस्व विभाग कर्मियों ने बाढ़ की चपेट में आई फसलों और मकानों के नुकसान का सर्वे शुरू कर दिया है।
एडीएम संतोष बहादुर सिंह ने बताया कि सर्वे सूची मिलते ही अहेतुक सहायता इत्यादि का वितरण शुरू हो जाएगा। उधर, बाढ़ पीड़ित पैलानी, जसपुरा, खप्टिहा कलां, चिल्ला, बबेरू, कमासिन, मरका आदि इलाकों में प्रशासन की ओर से राशन पहुंचाने की बात कही गई है। उधर, स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कैंप लगाकर इलाज और दवा वितरण कर रही हैं। पानी कम होते ही ग्रामीण भी अपने घरों की सुध ले रहे हैं।
केंद्रीय जल आयोग द्वारा शनिवार को जारी बाढ़ पूर्वानुमान बुलेटिन में अधिशासी अभियंता मनोज कुमार ने बताया कि शनिवार को देर रात यमुना नदी का जल स्तर घटकर 101.85 मीटर पर आ जाएगा। इसके बाद भी जल स्तर घटने का पूर्वानुमान है। यमुना नदी में चिल्ला घाट पर खतरे का निशान 100 मीटर पर है। उधर, केन नदी का जल स्तर भी लगातार कम हो रहा है। शनिवार को यह खतरे के निशान से दो मीटर नीचे जाकर 102 मीटर पैमाने पर पहुंच गई।
गंगऊ और बरियारपुर बांधों से हो रहे डिस्चार्ज में लगातार आ रही कमी से केन का पानी और घटने का पूर्वानुमान बताया गया है। शनिवार को गंगऊ से 42,070 और बरियारपुर से 39,388 क्यूसिक पानी केन नदी में डिस्चार्ज हो रहा था। जबकि शुक्रवार को 71 हजार क्यूसिक पानी का डिस्चार्ज हो रहा था। बबेरू प्रतिनिधि के मुताबिक बाढ़ प्रभावित समगरा गांव में शनिवार को विधायक चंद्रपाल कुशवाहा ने पीड़ितों को लंच पैकेट बांटे। एसडीएम महेंद्र प्रताप, तहसीलदार विपिन कुमार, नायब तहसीलदार जितेंद्र सिंह भी उपस्थित थे।
बेंदा में बाढ़ पीड़ितों को दवाएं बांटी
तिंदवारी। बाढ़ प्रभावित बेंदा गांव में शनिवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कैंप लगाकर बाढ़ पीड़ितों को ब्लीचिंग पाउडर और क्लोरीन की गोलियां व अन्य दवाएं बांटीं। आगाह किया कि बाढ़ के बाद बीमारियों का खतरा बढ़ा रहता है। सफाई का विशेष ध्यान रखें। पीएचसी के डा.रूपेश त्रिपाठी, शोभित गुप्ता, फार्मेसिस्ट वीरेंद्र सिंह सहित ग्राम प्रधान प्रतिनिधि विवेक कुमार सिंह मौजूद रहे।
बाढ़ में बाल-बाल डूबने से बची यात्रियों से भरी कार
बांदा। इलाज के लिए कानपुर जा रहे मध्य प्रदेश के लोगों की इनोवा कार चिल्ला पुल के आगे सड़क पर यमुना नदी की बाढ़ में डूबते-डूबते बची। स्थानीय पुलिस ने तत्काल रेस्क्यू आपरेशन करते हुए कार सवारों को वाहन सहित सही सलामत बाहर निकाल लिया। बड़ा हादसा बाल-बाल बचा।
सतना (एमपी) से यह कार चालक दीनदयाल वर्मा लेकर कानपुर जा रहा था। इसमें मोहम्मद यूनुस कुरैशी अपनी मां को इलाज के लिए कानपुर ले जा रहे थे। चिल्ला पुल पार करते ही ललौली रोड पर कई दिनों से यमुना के भरे पानी से गुजरते समय कार का इंजन बंद हो गया।
कार में पानी भरने लगा। इसी दौरान ग्रामीणों ने देखा तो तत्काल चिल्ला थाने को सूचना दी। क्षेत्राधिकारी राघवेंद्र सिंह और चिल्ला प्रभारी निरीक्षक अन्य पुलिस कर्मियों के साथ तत्काल पहुंचे और रेस्क्यू आपरेशन करते हुए कार में फंसे दो पुरुष व तीन महिलाओं को कार सहित पानी के बाहर निकाला। उधर, ललौली (फतेहपुर) थाना प्रभारी भी आ गए।
बाढ़ का पानी उतरने के बाद जसपुरा क्षेत्र में दवाओं का छ़िड़काव करती स्वास्थ्य विभाग की टीम।- फोटो : BANDA
बबेरू में बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र में एसडीएम को निर्देश देते विधायक चंद्रपाल कुशवाहा।- फोटो : BANDA