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Banda News: चेंबर में एक्सईएन की खाली पड़ी रही कुर्सी, अफसरों ने साधी चुप्पी

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अधिशासी अभियंता नगरीय की खाली पड़ी कुर्सी। - फोटो : स्रोत : परिजन
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बांदा। शहर में अतिक्रमण अभियान को लेकर बिजली का शटडाउन न दिए जाने पर एसडीएम के एक्सईएन को दो घंटे तक बंधक बनाने का मामला मीडिया की सुर्खियों में रहा। शुक्रवार को एक्सईएन कार्यालय नहीं पहुंचे। उधर, एसडीएम ने कहा कि ऐसा कोई मामला ही नहीं है। वह नोटिस देंगे।
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शहर के कचहरी तिराहे से मुक्तिधाम रोड तक बुधवार को अतिक्रमण हटवाया गया था। इसमें एसडीएम सदर नमन मेहता , पीडब्ल्यूडी एक्सईएन मनोज कुमार पांडेय, सीओ सिटी सहित कोतवाल व पुलिस फोर्स मौजूद रही। बताया गया कि अतिक्रमण हटाने के दौरान एसडीएम नमन मेहता ने शटडाउन के लिए बिजली विभाग के एक्सईएन राजीव रंजन को फोन किया। उन्होंने फोन नहीं उठाया। इस पर तहसीलदार की गाड़ी भेजकर एक्सईएन जिस स्थिति में घर के कपड़े पहने थे, उसी स्थिति में उन्हें बैठा लाया गया।
कहा जा रहा है कि एसडीएम ने इस दौरान दो घंटे तक एक्सईएन को गाड़ी में ही बंधक बनाए रखा गया। साथ ही उनके साथ अभद्रता भी हुई। शुक्रवार को यह खबर सुर्खियों में आई तो अधिकारी खुद हैरान दिखे। एसडीएम नमन मेहता ने कहा कि उन्होंने तो एक्सईएन को न बंधक बनाया है और न ही अभद्रता की है। वह इस पर नोटिस भेज रहे हैं।
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उधर, एक्सईएन राजीव रंजन के चेंबर में उनकी कुर्सी पूरे दिन खाली पड़ी रही। फरियादी आए और पूछकर लौट गए। मुख्य अभियंता कार्यालय में कुछ कर्मचारियों ने बताया कि ऐसी घटना तो हुई है। इसको लेकर कार्यालय में अफसरों के बीच मीटिंग भी हुई है। साथ ही शासन व प्रबंध निदेशक को इस मामले को लेकर अधिकारियों द्वारा पत्र भी भेजा गया है। हालांकि इसकी किसी अफसर ने पुष्टि नहीं की।
वर्जन-
-एक्सईएन को बंधक बनाए जाने जैसा कोई मामला हमारे सामने नहीं आया है। यदि ऐसी कोई रिपोर्ट आती है तो वह इस पर आगे की कार्रवाई करेंगे। -राजेश कुमार, मुख्य अभियंता, दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम।
अभियान में पूरे समय रहे, पर ऐसा कुछ नहीं हुआ
नगर कोतवाली के इंसपेक्टर बलराम सिंह ने बताया कि वह बुधवार को अतिक्रमण हटाने के अभियान में सुबह सात बजे ही पहुंच गए थे और पूरे समय रहे। आठ बजे एसडीएम नमन मेहता पहुंचे। 15 मिनट बाद एक्सईएन राजीव रंजन अपनी गाड़ी से आए थे। इसके बाद शटडाउन लिया गया। मौके पर एएसपी व सीओ सिटी भी मौजूद रहे। वह खुद पुलिस फोर्स के साथ रहे। इस दौरान बंधक बनाने जैसी कोई घटना हुई होती तो सबको पता चलता। न ऐसी कोई बात हुई और न ही कोई तहरीर दी गई है।
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