बांदा। दो करोड़ रुपये से ज्यादा लंबित बिलों के भुगतान को लेकर शुक्रवार को दोपहर जल संस्थान में अधिशासी अभियंता और ठेकेदारों के बीच जमकर विवाद हो गया। अधिशासी अभियंता के विरोध में कुछ अधीनस्थ अभियंता भी आ गए। मामला हाथापाई तक पहुंच गया। पुलिस बुला ली गई।
अधिशासी अभियंता ने अपने ऊपर हमले और जान के खतरे तथा उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक सहित अन्य अधिकारियों को पत्र भेजा है। उधर, सहायक और अवर अभियंताओं ने अधिशासी अभियंता पर अभद्रता और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। साथ ही पांच दिन के सामूहिक अवकाश पर चले गए हैं। जल संस्थान महाप्रबंधक से यह अवकाश स्वीकृत करने की मांग की है। उधर, ठेकेदारों ने मंडलायुक्त से अधिशासी अभियंता की शिकायत की है।
अधिशासी अभियंता रतन लाल अहिरवार ने बताया कि उन्होंने 30 अगस्त को यहां ज्वाइन किया है। दो करोड़ रुपये से भी ज्यादा के काम दर्शा कर बिल तैयार किए गए हैं। शुक्रवार को दोपहर वह अपने कमरे में थे तभी ठेकेदार, सहायक अभियंता व अवर अभियंता आकर उन पर भुगतान का दबाव बनाने लगे, जबकि जितने के बिल बनाए गए हैं उतना पैसा विभाग के खाते में नहीं है। इनमें कई काम फर्जी प्रतीत होते हैं।
यह बात कहे जाने पर ठेकेदारों, एई और जेई ने उनका मोबाइल छीन और कमरे में बंद कर दिया। उन्हें जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया। उन्होंने पुलिस बुलाकर अपने को बचाया। अपने साथ हुए दुर्व्यवहार की शिकायत आयुक्त, डीएम, जल संस्थान महाप्रबंधक, पुलिस अधीक्षक से की है।
उधर, दो सहायक अभियंता और एक अवर अभियंता ने महाप्रबंधक को दिए शिकायती पत्र में कहा कि विभाग हित में आपसी विचार-विमर्श के दौरान अधिशासी अभियंता बदतमीजी पर उतर आए। ठेके पर लगे कर्मी की स्थलवार सूची मांगी। यह असंभव बताने पर वह भड़क उठे।
वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यालय के काम न कराने को कहा। अभियंताओं ने कहा कि अधिशासी अभियंता ने उन्हें सबक सिखाने की धमकी दी है। कोई भी अप्रिय घटना हो सकती है। ऐसे में वह काम नहीं कर सकते हैं। अभियंताओं ने पांच दिन (28 सितंबर) तक का अवकाश दिए जाने की मांग की है। कहा है कि ताकि किसी अभियंता की धर्मपत्नी विधवा होने से बच सके।
उधर, मंडलायुक्त को सामूहिक हस्ताक्षरों से दिए शिकायती पत्र में जल संस्थान ठेकेदारों ने कहा कि उनका साढ़े तीन करोड़ से ज्यादा का भुगतान बकाया है। शुक्रवार को वह अधिशासी अभियंता से इस बारे में मिलने गए तो अधिशासी अभियंता तैश में आ गए और सरकारी काम में बाधा डालने की एफआईआर दर्ज कराने की धमकी दी। कहा कि जब तक वह हैं भुगतान नहीं करेंगे।
ठेकेदारों ने अधिशासी अभियंता का यहां से तत्काल तबादला करने और भुगतान कराने की मांग की। यह भी कहा कि अधिशासी अभियंता को उच्चतम न्यायालय ने महाप्रबंधक पद से रिवर्ट किया है। इससे क्षुब्ध होकर वह सरकारी काम में रुचि नहीं ले रहे और रोड़े अटका रहे हैं। शिकायतकर्ता ठेकेदारों में महेश कुमार तिवारी, अमित सेठ, संतोष सिंह, नवाब खां, मुईन खां, सुधीर तिवारी, राज किशोर, राजकुमार, मलखान, केपी सिंह, अरुण कुमार, सचिन निगम, देवीचरण त्रिपाठी, रामआसरे गुप्ता, मुश्ताक, संतोष गुप्ता इत्यादि शामिल हैं।