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‘किसान बनके रहिए सइयां, मानो बात हमारी’

Mon, 12 Jan 2015 12:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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‘किसान बनके रहिए सइयां मानो बात हमारी, खेती-बाड़ी में फूले-फले हमारे घर की क्यारी।’ बुंदेलखंड की सबसे प्राचीनतम विधा ‘कुम्हरई’ में स्थानीय कलाकारों ने खेती-किसानी का संदेश दिया।
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मानवीय शिक्षण संस्थान बड़ोखर खुर्द में जागरूक किसान प्रेम सिंह के यहां किसानों की महफली सजी। फिजी से आए 10 किसानों के दल ने यहां किसानों से खेती के गुर साझा किए।

कार्यशाला में भारतीय मूल की सुलोचना देवी (फिजी) ने कहा कि खेती-किसानों को व्यवसाय के तौर पर अपनाएं तो कभी भी घाटा नहीं उठाना पड़ेगा। गन्ने की खेती करें तो उसके साथ अन्य फसलें भी उगाएं ताकि उससे लागत का खर्च निकल सके।
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फिजी की किसान लीलावती ने कहा कि खेती के साथ मत्स्य पालन में आमदनी के रास्ते खुलते हैं। इससे पहले प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह ने फिजी के किसानों का परिचय कराया। यहां खेती करने के तौर-तरीकों पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि फिजी छोटा देश है और चारो तरफ समुद्र से घिरा है। मौसम भी खेती के अनुकूल नहीं है। फिर भी यहां के किसान बेहद खुश हैं। बुंदेलखंड के किसान यदि जैविक खेती करें और सहायक के तौर पर पशुपालन, मुर्गी पालन, बकरी पालन, भैस पालन, बागवानी आदि करें तो उन्हें खर्च का मोहताज नहीं होना पड़ेगा।

कार्यशाला के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘कुम्हरई’ की महफिल सजी। कर्म भूमि समाज सेवा संस्थान बड़ोखर बुजुर्ग प्रबंधक चंद्रपाल सिंह की अगुवाई में कलाकार पर्वत लाल प्रजापति, कमला, राजकरन, मोहनलाल, सिद्ध गोपाल, छोटेलाल व विजय कुमार ने कई गीत प्रस्तुत कर फिजी के किसानों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

फिजी के किसानों के दल में रेशमा शर्मा, पेमा, मकरेता, बीना देवी, फूला देवी, सैमोनी, सेमी, कैलेवी, कैमा  व रातूपेनी आदि शामिल थे। ये किसान सोमवार को पनगरा (नरैनी) में धान व गन्ने की खेती का प्रशिक्षण लेंगे। इसके बाद चित्रकूट रवाना हो जाएंगे।

दो दिन मेले के बाद यहां बड़ोखर में जैविक खाद का प्रशिक्षण लेंगे। खहरा (मटौंध) में जागरूक किसानों के यहां प्रगतिशील खेती के गुर सीखेंगे। अपना अनुभव साझा करेंगे। इस मौके पर यहां के किसान राम प्रकाश, सुरेंद्र सिंह व फूलादेवी शामिल रहे।


‘मेहनत व लगन से खेती करें तो अच्छी कमाई’
‘भारतीय किसानों के पास तो खुद की जमीन है और मौसम भी पूरी तरह अनुकूल है। फिर भी किसान खेती से संतुष्ट नहीं है। इसकी वजह उनमें कर्तव्य निष्ठा की कमी है।’ ये बातें फिजी देश से किसान दल में आईं रेशमा शर्मा ने सोमवार को यहां बड़ोखर खुर्द में ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत में कहीं।

उन्होंने बताया कि फिजी में सरकार लीज (किराए) पर जमीन देती है। किसान उसी में खेती-बाड़ी कर जीविका चला रहे हैं। बारिश यहां नवंबर से अप्रैल तक होती है। किसान धान, अरहर, मूंग, मिर्च, साग-सब्जी, चाय आदि की फसलें उगाते हैं, लेकिन खेती के साथ यहां दूसरा व्यवसाय जरूर है।

हर घर से एक व्यक्ति सरकारी या प्राइवेट नौकरी में अच्छी आय हासिल करता है। सभी बच्चे स्टैंडर्ड स्कूल में पढ़ते हैं। गन्ना की खेती यहां प्रमुख है। इसके साथ किसान यहां पोल्ट्री फार्म, मधु पालन, डेयरी, पशु पालन आदि में अच्छी आय अर्जित करते हैं।

उन्होंने कहा कि यहां किसान यदि संकल्पित होकर मेहनत से खेती करें और तकनीक का प्रयोग करे तो फिजी से कई गुना उपज ली जा सकती है। किसान खुशहाल हो सकते हैं।  
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