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चूल्हा-चौका के बाद चूडियां बना रहीं महिलाएं

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नरैनी (बांदा)। स्वयं सहायता समूह की महिलाएं चूल्हा-चौका के बाद चूड़ियां बनाकर परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना रही हैं। समूह 22 महिलाएं चूड़ी-कंगन बनाने के काम में लगी हैं। उनके बनाए चूड़ी-कंगन की बाजार में अच्छी मांग है।
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फिरोजाबाद को चूड़ियों की नगरी कहा जाता है लेकिन जिले की महिलाओं ने भी इस काम में महारत दिखा रही हैं। नरैनी ब्लॉक में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के समूहों से जुड़ीं 22 महिलाएं चूड़ी-कंगन बना रहीं हैं। उन्हें इसकी ट्रेनिंग ग्रामीण उद्यमिता परियोजना (एसवीईपी) के तहत बिहार से आए ट्रेनरों ने दी है। महिलाएं एक हफ्ते में ही चूड़ी बनाने के काम में माहिर हो गईं। हाल ही में कालिंजर में लगे मेले में समूह की बनाई चूड़ियां खूब बिकीं। गांवों में फेरी लगाकर भी चूड़ियां बेचकर महिलाएं आमदनी हासिल कर रही हैं।
एक माह में बेचीं पांच हजार की चूड़ियां
समूह सदस्य मूड़ी गांव की राजकुमारी और सढ़ा गांव की गोमती ने बताया कि उन्हें चूड़ी बनाने का काम अच्छा लग रहा है। कालिंजर के मेले में स्टाल लगाकर 2-2 हजार रुपये की चूड़ियां बेचीं हैं। एक माह में 5-5 हजार की चूड़ियां बेच चुकी हैं। चूड़ी बनाने के लिए मैटेरियल अपने पास से ही खरीदा है।
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गृह उद्योग के रूप में चालू किया चूड़ी कारोबार
मूड़ी गांव की पप्पी द्विवेदी ने बताया कि चूड़ी गृह उद्योग के रूप में शुरू कर दिया है। साथ में कंगन भी बना रहीं हैं। शुरू में महिलाओं ने इसे कठिन काम माना था। अब सब दिलचस्पी के साथ कर रहीं हैं।
बिहार से मंगा रहे कच्चा मैटेरियल
एसवीईपी परियोजना का यहां संचालन कर रहे केरला के मेंटर अनिरुद्ध कुमार ने बताया कि चूड़ी-कंगन बनाने वाली महिलाओं को उन्होंने ट्रेनिंग देकर इस काम में दक्ष बना दिया है। कच्चा सामान बिहार से मंगाया जा रहा है। जरूरत पड़ी तो आर्थिक मदद भी दी जाएगी।
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