जिले में महिलाओं के नाम पर दर्ज वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है लेकिन इनकी तुलना में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वाली महिलाओं की संख्या अभी भी काफी कम है। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) उदयवीर सिंह के अनुसार वर्तमान में जिले में 4,611 महिलाओं ने ड्राइविंग लाइसेंस बनवाए हैं, जबकि पुरुषों के लाइसेंस की संख्या 12 हजार से अधिक है। यह आंकड़ा बताता है कि वाहन मालिक होने के बावजूद बड़ी संख्या में महिलाएं खुद गाड़ी नहीं चला रहीं या लाइसेंस बनवाने के प्रति उतनी जागरूक नहीं हैं।
जिले में इस समय एक लाख 19 हजार से अधिक वाहन पंजीकृत हैं, जिनमें ज्यादातर कारें और दोपहिया वाहन शामिल हैं। इनमें करीब 10 फीसद वाहन महिलाओं के नाम पंजीकृत हैं। आंकड़ों के मुताबिक जिले में आठ हजार से अधिक वाहन महिलाओं के नाम हैं लेकिन उनके मुकाबले लाइसेंस धारक महिलाओं की संख्या अभी भी आधी है। यह अंतर महिलाओं की ड्राइविंग से जुड़ी सामाजिक झिझक और पारिवारिक बाध्यताओं की ओर भी इशारा करता है।
हालांकि सकारात्मक पहलू यह है कि बीते एक वर्ष में महिलाओं द्वारा लाइसेंस बनवाने की संख्या में 25 से 35 फीसद तक वृद्धि दर्ज की गई है। परिवहन विभाग का मानना है कि शहर में बढ़ते रोजगार अवसर शिक्षा का प्रसार और महिलाओं में आत्मनिर्भरता की भावना इस बढ़ोतरी का कारण है। साथ ही परिवार भी अब महिलाओं को ड्राइविंग के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं, जिससे उनकी संख्या लगातार बढ़ रही है।
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) उदयवीर सिंह ने बताया कि जिले में महिलाओं की ओर से ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की रुचि पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी है। उन्होंने कहा इस समय 4,611 महिलाओं के पास ड्राइविंग लाइसेंस हैं। यह संख्या अभी पुरुषों की तुलना में कम है। हमारा प्रयास है कि अधिक से अधिक महिलाएं जागरूक हों और सुरक्षित ड्राइविंग के लिए लाइसेंस अवश्य बनवाएं।