बांदा। 15 वर्ष पुराने एनडीपीएस एक्ट के मामले में विशेष न्यायाधीश (ईसी एक्ट) की अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में आरोपी महिला को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में विफल रहा।
अभियोजन के अनुसार, 14 फरवरी 2011 को बबेरू थाना पुलिस ने गांधी नगर निवासी शांति देवी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 2.800 किलोग्राम डोडा पोस्त व अफीम पाउडर व सात ग्राम स्मैक बरामद करने का दावा किया था। इस मामले में एनडीपीएस एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कर आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया गया था। सुनवाई के दौरान अभियोजन ने तीन पुलिसकर्मियों को गवाह के रूप में पेश किया।
बरामद मादक पदार्थ के नमूने, सीलिंग और उसकी सुरक्षित अभिरक्षा की कड़ी भी साबित नहीं की जा सकी। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि बरामदगी केवल पुलिसकर्मियों के बयान पर आधारित रही। जबकि मौके पर स्थानीय लोगों की मौजूदगी के बावजूद किसी स्वतंत्र गवाह को शामिल नहीं किया गया।
इन्हीं आधार पर विशेष न्यायाधीश ने शांति देवी को एनडीपीएस एक्ट के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। हालांकि न्यायालय ने अपील की स्थिति को देखते हुए आरोपी को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और दो जमानतदार प्रस्तुत करने का निर्देश दिए।