राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना में भी किसानों के साथ खेल किया गया है। बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि से 80 से 90 फीसदी नुकसान के बावजूद लाही, सरसों, मसूर, मटर, चना, अरहर आदि फसलों पर किसानों को बीमा राशि से धेला नहीं मिलेगा।
कृषि बीमा योजना में जिले में एचडीएफसी एग्रो जनरल इंश्योरेंस कंपनी को नामित किया गया है। रबी की फसल में 31 दिसंबर तक प्रीमियम जमा करने वालों को फसल बीमा में शामिल किया गया है। हालांकि इसमें भी क्षेत्रवार ऐसा खाका तैयार किया गया है कि जिसमें तमाम किसान प्रीमियम जमा करने के बावजूद बीमा लाभ से वंचित रह जाएंगे।
सबसे अधिक नुकसान लाही, सरसों बोने वाले किसानों को उठाना पड़ेगा। लगभग पकने को तैयार यह फसल बारिश व ओलावृष्टि से पूरी तरह सफाचट हो गई। इसके बावजूद सिर्फ मोहन पुरवा, बेंदा और चंदवारा न्याय पंचायत की 22 ग्राम पंचायतें बीमा में शामिल हैं। इनके सिवा जिले में किसी भी गांव के किसान को इस पर क्षतिपूर्ति नहीं मिलेगी।
तिलहन में सबसे अधिक बोई जाने वाली अलसी की फसल को पूरे जिले में बीमा से बाहर किया गया है। मटर में सिर्फ मोहन पुरवा, मटौंध, पपरेंदा, रामपुर व करहुली न्याय पंचायतों के 34 ग्राम पंचायतों को बीमा में शामिल किया गया है। बाकी 66 न्याय पंचायतों के किसानों को मटर के नुकसान पर बीमा कंपनी भरपाई नहीं करेगी।
पूरे जिले में मसूर की फसल बुरी तरह चौपट हुई है। इसके बावजूद तिंदवारा, रामपुर, चौसड़, अतर्रा ग्रामीण, डढ़वा मानपुर, करतल, जमवारा, पौहार, पड़मई, तुर्रा, कालिंजर, बदौसा, रसिन, नहरी, बरई मानपुर, गोखिया, पनगरा, बहेरी व गिरवां न्याय पंचायत के गांवों में इस फसल पर बीमा कंपनी कोई भरपाई नहीं करेगी।
चना की फसल में अतर्रा तहसील की गोखिया, बहेरी और अतर्रा ग्रामीण न्याय पंचायत को बीमा कवरेज से बाहर रखा गया है। अरहर की फसल में 12 न्याय पंचायतों को क्षतिपूर्ति दायरे से बाहर किया गया है। इसमें लामा, करबई, सांतर, पवइया, भदेहदू, बिसंडा ग्रामीण, चंद्रायल, कोर्रही, ओरन ग्रामीण, पड़मई, अर्जुनाह और बहेरी गांव शामिल हैं।
उप कृषि निदेशक उमेशचंद्र कटियार का कहना है कि अधिकांश बुवाई वाले क्षेत्रफल के आधार पर पूर्व में यह खाका तैयार किया गया था। यह संशोधित बीमा योजना 2014 से 2016-17 के लिए निर्धारित है।