बांदा। डीएम की ओर से सुध लेने के बाद अब सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का काम शुरू किया गया है। करीब साढ़े तीन करोड़ की लागत से साल भर पहले बना यह प्लांट अभी तक शोपीस ही था। शहर की सारी गंदगी खेतों और खाली पड़े स्थानों पर ही फेंकी जा रही थी। स्वच्छ भारत मिशन के नोडल अभिषेक खरे का कहना है कि एसटीपी के परीक्षण का काम शुरू कर दिया गया है। जल्द ही इसे चालू भी करा दिया जाएगा।
शहर में शहर के मलमूत्र के निस्तारण के लिए स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहर से करीब 10 किलो मीटर दूर गंछा गांव के पास एक एकड़ में एसटीपी बनाया गया है, लेकिन पिछले एक साल से बनकर तैयार प्लांट का कोई उपयोग नहीं हो रहा है। वहां पर सिर्फ सीवरेज मलमूत्र ले जाने वाले टैंकर ही खड़े किए जाते हैं। डीएम के निर्देश पर अब नगर पालिका ने एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) के परीक्षण का काम शुरू कराया है। दिया है। स्वच्छ भारत मिशन के नोडल का कहना है कि प्लांट की मदद से प्रतिदिन करीब 32 टन मलमूत्र का निस्तारण होगा।
- ये थी कमियां
नगर पालिका के पास प्लांट तक गंदगी पहुंचाने के लिए पर्याप्त टैंकर भी नहीं हैं। इसके अलावा अभी शहर के कई वार्डों में सीवर लाइन भी नहीं बिछी है। इस कारण ठेकेदार भी टेंडर डालने में रुचि नहीं ले रहे हैं। यही सब वजह है कि साल भी प्लांट के चलने का सिर्फ इंतजार ही किया जा रहा है।
- कंपोस्ट के साथ मिलेगा सिंचाई का पानी
प्लांट में सीवरेज से प्राप्त होने वाले मलमूत्र से मशीनों के माध्यम से पानी व मल अलग किया जाएगा। मल को सुखा कर वर्मी कंपोस्ट बनाई जाएगी। गंदे पानी पानी शोधित कर खेतों की सिंचाई के लिए किसानों को सस्ते दर बेचा जाएगा।