अतर्रा (बांदा)। बीमारी का मौसम है। शायद की कोई घर बचा हो जहां कोई न कोई शख्स सर्दी, बुखार, खांसी जैसी सामान्य बीमारी से पीडि़त न हो।
वहीं, सरकारी अस्पतालों में इलाज का बुरा हाल है। बानगी के तौर पर अतर्रा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का हाल देखें। सीएचसी में रोज 700 से 800 मरीज पहुंच रहे हैं लेकिन स्वास्थ्य सुविधाएं घुटनों पर हैं। कहीं डॉक्टर के लिए मरीज दो से चार घंटे तक इंतजार कर रहे हैं तो कहीं बिजली गुल होने से एक्सरे ठप है।
लिवर, किडनी, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच करने वाली बायोकेमिस्ट्री मशीन करीब डेढ़ माह से खराब पड़ी है। डिवाइस चिप के अभाव में हेल्थ मशीन भी बंद है।
सोमवार को अस्पताल की पड़ताल में मरीजों की भीड़, जलभराव और गंदगी के बीच परचा बनवाने से लेकर जांच और डॉक्टर को दिखाने तक की अव्यवस्था सामने आई। सीएचसी अधीक्षक डॉ. अरविंद कुमार के अनुसार बारिश के बाद बुखार, खुजली और डायरिया के मरीज बढ़े हैं।
इसके अलावा हड्डी संबंधी समस्याओं, टीबी, अस्थमा और शुगर के मरीज भी पहुंच रहे हैं। इतनी बड़ी संख्या में मरीजों की तुलना में अस्पताल में सिर्फ एक एमबीबीएस और चार बीएमएस डॉक्टर हैं।
अधीक्षक ने बताया कि रविवार को नौ मरीज इमरजेंसी में आए थे। इनमें एक मरीज को रेफर किया गया जबकि आठ मरीज इलाज के बाद चले गए। इस दौरान कई मरीज दो से चार घंटे तक अपनी बारी का इंतजार करते मिले। कुछ मरीज डॉक्टर कक्ष के बाहर फर्श पर बैठे थे तो कुछ महिलाएं अस्पताल की पट्टी पर लेटी नजर आईं।
लोधौरा निवासी नकुल कुमार मां रीना देवी का इलाज कराने पहुंचे थे। बताया कि चार घंटे से इंतजार कर रहे हैं। कालिंजर के पुरैनिया निवासी लवकुश ने ब्लड जांच की रिपोर्ट न देने और नमूने पर नाम नहीं लिखने का आरोप लगाया। पखरौली निवासी अभी ठाकुर ने बताया कि उन्हें 15 दिन से बुखार है।जांच में कुछ नहीं आया। उन्होंने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाया। परचा काउंटर के बाहर जलभराव और गंदगी मिली।
बिजली गई तो एक्सरे सेवा भी ठप
सीएचसी में एक्सरे के लिए भी मरीजों को बिजली का इंतजार करना पड़ रहा है। एक्सरे तकनीकी सहयोगी राजनारायण के मुताबिक बिजली रहने पर रोज 35 से 40 एक्सरे किए जाते हैं। सोमवार को धुमरा निवासी 70 वर्षीय सहदेव, थनैल निवासी ललित और सुदामापुरी निवासी भोलिया करीब एक घंटे से बिजली आने का इंतजार करते मिले। मरीजों ने बिजली जाने पर वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने पर नाराजगी जताई।
डेढ़ माह से बंद बायोकेमिस्ट्री मशीन
बायोकेमिस्ट्री मशीन खराब होने से करीब डेढ़ माह से लिवर, किडनी, शुगर और कोलेस्ट्रॉल जैसी महत्वपूर्ण जांचें नहीं हो पा रही हैं। वहीं डिवाइस चिप के अभाव में परिसर में रखी हेल्थ मशीन भी बंद पड़ी है। यानी मरीजों को इलाज के साथ जरूरी जांचों के लिए भी परेशानी उठानी पड़ रही है।