प्राइवेट चिकित्सकों को झोलाछाप कहा जाना मंजूर नहीं। उन्हें चिकित्सामित्र कहा जाना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा आए दिन छापेमारी गलत है। शुक्रवार को प्राइवेट प्राथमिक चिकित्सा मेडिकल सोसाइटी के बैनर तले निजी चिकित्सकों ने यहां सिटी मजिस्ट्रेट चित्रलेखा सिंह को ज्ञापन सौंपा। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम भेजे गए ज्ञापन में 12 मांगे शामिल हैं।
ज्ञापन में मेडिकल स्टोरों में फार्मेसिस्ट की शर्त हटाने, आरएमपी का रजिस्ट्रेशन फिर चालू करने, क्लीनिक और नर्सिंग होम आदि में चिकित्सा में सहयोग कर रहे गैर पंजीकृत कंपाउंडर को पंजीकृत करके चिकित्सामित्र घोषित करने, अन्य प्रदेशों की तरह रजिस्ट्रेशन उपलब्ध कराने, झोलाछाप शब्द खत्म करने, प्राथमिक उपचार के लिए प्रमाणपत्र जारी करने आदि की मांगे की गईं।
यह भी कहा कि उन्हें न बेरोजगारी भत्ता चाहिए, सिर्फ प्राथमिक उपचार का अधिकार चाहिए। ज्ञापन देने वालों में डा.डीके गुप्ता, डा.आरके जड़िया, डा.रामराज गुप्ता, डा.आमोद वर्धन त्रिपाठी, डा.रमेश राजपूत, डा.अखिलेश यादव, डा.जेके पांडेय, डा.रामपाल श्रीवास, डा.सोनू गुप्ता, डा.राजू सविता आदि शामिल रहे।