एमपी की सरहद पर रामनई गांव के पास प्राकृतिक स्रोत
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केन नदी की जलधारा को जीवन देने वाला रामनई गांव का प्राकृतिक जल स्रोत उपेक्षा का शिकार है। मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित यह जल स्रोत पूरे वर्ष मोटी जलधारा के साथ जारी रहता है। इसका पानी शीतल और शुद्ध है, लेकिन दोनों ही सूबों की सरकारों ने प्रकृति की इस देन को संवारने और उसका भरपूर लाभ उठाने की जहमत नहीं उठाई।
बांदा जिला मुख्यालय से करीब 55 किलोमीटर दूर करतल क्षेत्र में मध्य प्रदेश के पन्ना जिले की सरहद पर रामनई गांव बसा है। इस गांव के तीनों ओर उत्तर प्रदेश (बांदा) की भूमि है। यहीं मिट्टी के टीलों से प्राकृतिक जलस्रोत निकला है। इससे इतना अधिक पानी निकलता रहता है कि नाले का रूप नजर आ रहा है। करीब एक किलोमीटर बहने के बाद इस पानी की जलधारा केन नदी में मिल जाती है।
ग्राम प्रधान धम्मन साहू बताते हैं कि इस क्षेत्र की पूर्व विधायक कुसुम सिंह मेहदेले ने अपने विधायकी काल में पांच वर्ष पूर्व निधि से नाले की दीवार, रपटा, सीढ़ियां बनवाईं थीं। इसके अलावा यूपी-एमपी सरकारें ने इसके प्रति कोई दिलचस्पी नहीं ली। हालांकि स्थानीय बाशिंदे लगातार मध्य प्रदेश सरकार से यहां पंप कैनाल बनवाने की मांग करते रहे हैं। ग्राम प्रधान ने बताया कि इस क्षेत्र में पेयजल का संकट है।
जिला पंचायत द्वारा बनाई टंकी और बिछाई गई पाइप लाइन से आपूर्ति नहीं हो रही। गांव के मइयादीन और नंदूलाल लोधी ने बताया कि यह प्राकृतिक जलस्रोत सैकड़ों वर्ष पुराना है। इसे संरक्षित और विकसित करने के लिए ध्यान नहीं दिया जा रहा। मानपुर (नरैनी) के प्रधान रामस्वरूप चतुर्वेदी ने कहा कि गर्मी में सूखने की कगार पर पहुंच जाने वाली केन नदी को सदानीरा बनाए रखने के लिए यह जलस्रोत काम आ सकता है। बशर्ते इसका ठीक से रखरखाव हो।