बांदा। बरियारपुर बांध के पानी को लेकर यूपी-एमपी फिर आमने-सामने आ सकते हैं। पानी बंटवारे का यह विवाद काफी पुराना है। पहले भी एमपी के किसान अपने जनप्रतिनिधियों की शह पर यूपी के हिस्से का पानी लूट चुके हैं।
एम के छतरपुर जिले में स्थित बरियारपुर बांध सहित गंगऊ और रनगवां बांधों की पूरी रखवाली और उस पर होने वाला खर्च यूपी सिंचाई विभाग उठाता है। इन बांधों के पानी में यूपी और एमपी के बीच बंटवारा है। 1972 में मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाशचंद्र सेठी और उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी के हस्ताक्षरों से बंटवारा/समझौता लिखित रूप से हुआ था।
इसके मुताबिक मध्य प्रदेश खरीफ फसलों के लिए 31 अक्तूबर तक बांधों का दो टीएमसी पानी ले सकेगा। यूपी-एमपी के बीच 36 और 15 अनुपात में पानी का बंटवारा हुआ है। बरियारपुर वीयर/बांध में यूपी की मुख्य केन नहर और दूसरे छोर पर मध्य प्रदेश ने अपनी नहर बना रखी है। चूंकि बांध मध्य प्रदेश में है, इसलिए वहां के किसान और जनप्रतिनिधि अक्सर यहां धावा बोलकर अपने हिस्से के अलावा यूपी (बांदा) का पानी भी ले लेते हैं।
कई बार विवाद तूल पकड़ चुका है। मध्य प्रदेश के स्थानीय जनप्रतिनिधियों की इसमें पूरी शह रहती है। इस वर्ष भी एमपी के किसानों की नीयत में खोट है। उन्होंने यूपी के हिस्से वाले पानी में अपनी नजरें गड़ा दी हैं, जबकि 31 अक्तूबर के बाद एमपी का पानी लेने का हक खत्म हो गया है।
बांदा सिंचाई विभाग के अवर अभियंता मनोज सिंह ने बताया कि एमपी के स्थानीय किसान बरियारपुर बांध में कई दिनों से अपनी नहर चलाने की जुगत में हैं। फिलहाल उनको सख्ती से रोक दिया गया है। इसकी सूचना अधिकारियों को दी गई है।