बुंदेलखंड जैसे पिछड़े क्षेत्र में सुविधाओं के अभाव में भी बालिकाओं में आसमान छूने की चाहत है। किसी ने शिक्षा के क्षेत्र में तरक्की के कई शिखर छुए तो किसी ने ‘जल परी’ जैसा खिताब पाया।
संगीत और गायन में भी यहां की बालिका ने शोहरत का डंका बजाया है। इन होनहार बालिकाओं के पास मेडल और पुरस्कारों का खजाना जमा हो गया है। भविष्य में ये और ऊंची परवान की उम्मीदें पालकर लगातार आगे बढ़ रही हैं। ‘राष्ट्रीय बालिका दिवस’ पर इन बहादुर बेटियों की हम अपने पाठकाें को याद दिला रहे हैं।
शहरी सीमा से जुड़े भूरागढ़ गांव के मशहूर तैराक खेमराज निषाद की दो बेटियों ने तैराकी स्पर्धाओं में चित्रकूटधाम मंडल को आधा दर्जन से ज्यादा मेडल दिलाए हैं।
बड़ी बेटी ममता निषाद ने तैराकी के हुनर से जिले को कई बार गौरान्वित किया। उनकी पिछले वर्ष मिर्जापुर जिले के राष्ट्रीय स्तर के तैराक के साथ शादी हुई है।
छोटी बहन ललिता निषाद ने भी नेशनल स्तर पर कई सफलताएं हासिल की हैं। राज्य स्तर पर वर्ष 2012 से अब तक एक स्वर्ण, 8 रजत तथा 5 कांस्य पदक जीते हैं।
सबसे बड़ी बात यह है कि नेशनल गेमों में पहला स्थान लाने वाली ललिता सिर्फ 5 दिन तालाब और नदी में प्रैक्टिस करती है। बताया कि यहां खेल विभाग से कोई सपोर्ट नहीं मिलता। नेशनल स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए समय से जानकारी भी नहीं मिल पाती है।
पिछले वर्ष इसी वजह से प्रतिस्पर्धा से वह वंचित रह गई। स्टेडियम का तरणताल अधिकारियों की मनमानी का शिकार है। बेहद साधारण परिवार की इस बालिका को तैराकी क्षेत्र में रिकार्ड बनाने की चाहत है।