बांदा। मरता क्या न करता। बिसंडा क्षेत्र के बड़ागांव में कुछ ऐसा ही हुआ। भीषण गर्मी और उमस में कई दिनों से बिजली बगैर कष्टदायी जीवन जी रहे ग्रामीणों ने पावर कार्पोरेशन की उपेक्षा से तंग आकर गांव की क्षतिग्रस्त बिजली लाइनें और खंभे खुद दुरुस्त करने शुरू कर दिए। इस गांव में कई साल पूर्व राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना से लाइनें खिंची थीं।
केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजना से लगाए गए खंभे और बिजली की लाइनें घटिया लगाई गई हैं। मानक का पालन न होने पर मामूली आंधी में ही खंभे टेढ़े हो गए। तार ढीले होकर धरती के पास आ गए। इससे हादसे का भी डर है। आए दिन मामूली हवा में ही फाल्ट होने से बिजली गुल हो रही है। ग्रामीण बिजली विभाग सहित जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से फरियाद करते रहे, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
बड़ागांव के लोगों ने अब टेढ़े खंभों को सीधा करने और लाइनें दुरुस्त करने का काम खुद शुरू कर दिया है। हालांकि यह तकनीकी और जोखिम भरा काम है, लेकिन गांव के युवक शनिवार से इस काम में जुट गए। ट्रांसफार्मर के पास से फ्यूज हटाकर आपूर्ति बंद करके काम कर रहे हैं। युवाओं में जयराम पटेल, सुधीर कुमार पटेल, श्याम, शिवाकांत, अमितेंद्र, रामबाबू, श्यामबाबू, अमित, रामजी, देशराज, शुभम, छत्रपाल आदि शामिल हैं।
विभागीय अफसरों ने जताई अनभिज्ञता
बांदा। ग्रामीणों द्वारा खुद ही बिजली के खंभों और लाइनों को दुरुस्त करना पावर कार्पोरेशन अधिशासी अभियंता (वितरण) सविता ने नियम विरुद्ध बताया। उन्होंने कहा कि बिना विभागीय कर्मियों के ग्रामीणों को ऐसा नहीं करना चाहिए। ग्रामीण अक्सर हमारे कार्यों में हाथ बंटा देते हैं।
अधिशासी अभियंता ने कहा कि वे बड़ागांव विभागीय अभियंताओं को भेजकर पता करवा रहे हैं। उधर, उप खंड अधिकारी (बबेरू) अतुल ने कहा कि यह उनकी जानकारी में नहीं है। अवर अभियंता भूपेश ने कहा कि उन्हें भी इसकी जानकारी नहीं है। वह पता करेंगे।