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- फोटो : BANDA
बांदा। फाइलेरिया रोग को जड़ से मिटाने के लिए जिले के छह गांवों और शहर के दो संवेदनशील क्षेत्रों में नाइट ब्लड सर्वे अभियान में 1697 नमूने लिए गए। इनमें जमालपुर गांव में 507 नमूनों में नौ की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। पपरेंदा में 503, गड़रिया में 498 और बंथरी में 189 ब्लड सैंपल लिए गए। यह अभियान 30 अप्रैल तक चलेगा।
जिला मलेरिया अधिकारी पूजा अहिरवार ने बताया कि जिले में संभावित फाइलेरिया उन्मूलन अभियान से पहले नाइट ब्लड सर्वे में 4000 लोगों के ब्लड नमूना लेकर जांच की जानी है। मई माह में फाइलेरिया से रोकथाम को दवा खिलाने का अभियान चलेगा। उन्होंने बताया कि मलेरिया विभाग की टीम रात में गांवों में ब्लड सैंपल लेने के लिए सर्वे कर रही है। रात में सैंपल लेने की वजह यह है कि बीमारी के कीटाणु रात में ही पेरीफेरल (बाहरी) ब्लड में आता है। हर गांव से करीब 500 लोगों के ब्लड सैंपल जुटाना है। प्रत्येक टीम में चार स्वास्थ्य कर्मी शामिल हैं।
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मरीजों का इलाज कर रहा वार्ड ब्वॉय
तिंदवारी। प्रभारी चिकित्साधिकारी के छुट्टी में चले जाने से पीएचसी में आने वाले मरीजों का इलाज वार्ड ब्वॉय के जिम्मे है। गुरुवार को कई मरीजों ने उससे इलाज कराने से मना कर दिया और लौट गए। यहां प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ.अखिलेश एक महीने से छुट्टी पर हैं। एक अन्य चिकित्सक डॉ.रूपेश त्रिपाठी कोरोना ड्यूटी में लगे हैं। ऐसे में अस्पताल वार्ड ब्वॉय के हवाले है। दिनेश कुमार, शिव मोहन सिंह, जगदेव प्रसाद, रामखेलावन, शिव कुमार, साधना, कमला, राधा, सुमन आदि ने मरीजों ने आरोप लगाया कि उन्हें बाहर से दवाएं लिखीं जा रहीं है। पूर्व फौजी जयकरन सिंह व मनोज कुमार ने वार्ड ब्वॉय से इलाज कराने से मना कर दिया। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से पीएचसी में चिकित्सक तैनात करने और बाहर से दवाएं लिखने वाले वार्ड ब्वॉय के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
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