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वाल्मीकि समाज के पेट पर न मारें लात

Sat, 06 Aug 2016 11:25 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला, बांदा
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कलेक्ट्रेट में ज्ञापन देने आए वाल्मीकि समाज के लोग। - फोटो : अमर उजाला
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बांदा। निकायों में की जा रही सफाई कर्मचारियों की भर्ती में सामान्य और पिछड़े वर्ग के लोगों की दखलंदाजी वाल्मीकि समाज को फूटी आंख नहीं सुहा रही। उच्च जाति के लोगों द्वारा किए जा रहे आवेदन से खफा वाल्मीकि समुदाय सड़कों पर आ गया है। प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर कहा कि सफाईकर्मी के पद पर सिर्फ वाल्मीकि समाज के लोगों को ही भर्ती किया जाए। यह भी कहा कि संपन्न वर्ग के लोग गरीब वाल्मीकियों के पेट में लात न मारें।
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शनिवार को बड़ी संख्या वाल्मीकि समाज के महिला-पुरुषों ने प्रदर्शन किया। कलेक्ट्रेट में एसडीएम एके पुष्कर को ज्ञापन सौंपा। यह मुख्यमंत्री के लिए दिया गया है। इसमें कहा गया कि वाल्मीकि समाज के लोग ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं। गरीब भी हैं। सफाई पुश्तैनी पेशा है। दूसरी कोई नौकरी नहीं मिलती।

अब सफाई कर्मियों की भर्ती हो रही है तो सामान्य और पिछड़ी जाति के लोग और उच्च शिक्षित बेरोजगार आवेदन कर रहे हैं। इसके पहले बसपा सरकार में ऊंचे वर्गों के लोगों को सफाईकर्मी बना दिया था, लेकिन वे गांवों में सफाई नहीं कर रहे। अपने स्थान पर किसी को दिहाड़ी में रखकर सफाई करा देते हैं। पूरा वेतन खुद रख लेते हैं। यह वाल्मीकि समाज के पेट में लात मारना जैसा है।
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वाल्मीकि समाज ने मांग की कि निकायों में हो रही भर्ती में सिर्फ उन्हीं को वरीयता दी जाए। अन्य वर्ग के लोगों को नहीं। ज्ञापन देने वालों में उत्तर प्रदेश राज्य सफाई मजदूर संघ के प्रांतीय सचिव अनिल भारतीय, सपा अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के मीडिया प्रभारी कालिका प्रसाद वाल्मीकि समेत वाल्मीकि समाज के विजय कुमार, सुनील कुमार, तेजा लाल, दीपक कुमार, रमेश, संगम, अंकित, राहुल, मनोज कुमार इत्यादि शामिल रहे।
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