चित्रकूटधाम मंडल में खेतों की मिट्टी का परीक्षण कराने में किसान रुचि नहीं ले रहे हैं। इसके लिए मृदा परीक्षण विभाग भी किसानों को प्रोत्साहित नहीं कर सका। शायद यही वजह है कि मंडल में इस वर्ष मृदा परीक्षण का लक्ष्य 69 फीसदी से आगे नहीं बढ़ सका। पिछले वर्ष 90 प्रतिशत लक्ष्य पूरा कर लिया गया था।
इस वर्ष मंडल के चारों जिलों में खेतों से एक लाख 59 हजार 500 मिट्टी के नमूने लिए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। बेमौसम बारिश और ओलों से पीड़ित किसानों ने नमूना परीक्षण कराने में कुछ खास दिलचस्पी नहीं ली।
कृषि विभाग और भूमि संरक्षण विभाग भी अपने कर्मचारियों से बहुत ज्यादा मिट्टी के नमूने संकलित नहीं करा सके। नतीजे में इस वर्ष मात्र एक लाख 10 हजार 717 नमूनों की ही जांच हुई। जबकि पिछले वर्ष 2013-14 में एक लाख 42 हजार 706 मिट्टी के नमूनों की जांच की गई थी। पिछले और इस वर्ष लक्ष्य एक ही था।
मृदा परीक्षण विभाग के प्रभारी श्याम सिंह ने बताया कि मिट्टी के नमूने जुटाकर लैब तक पहुंचाने का जिम्मा 13 एजेंसियों पर है। इनमें कृषि और भूमि संरक्षण विभाग प्रमुख हैं। विभागों में स्टाफ की कमी से यह लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा। लक्ष्य के मुताबिक मिट्टी के नमूने लैब में आ ही नहीं रहे।
मृदा परीक्षण की एक जांच में लगभग 37 रुपये खर्च आता है। इस वर्ष एक लाख 10 हजार 717 नमूनों की जांच में 40 लाख 96 हजार 529 रुपये जांच शुल्क वसूला गया। मृदा परीक्षण प्रभारी श्याम सिंह के मुताबिक पूरी जांच में 37 रुपये और एनपीके (नाइट्रोजन, फास्फोरस व पोटाश) जांच में 50 रुपये लिया जाता है। जबकि प्राइवेट जांच एजेंसी 70 व 25 रुपये लेती हैं। प्रभारी ने बताया कि छह बीघा से कम जमीन वाले सीमांत किसानों के खेत की मिट्टी की जांच मुफ्त की जाती है।