फोटो- 18 जुलूस निकालते सर्वण समाज के लोग। संवाद
बांदा। यूजीसी के विरोध में विभिन्न सवर्ण संगठनों द्वारा आहूत भारत बंद का शहर में आंशिक असर देखने को मिला। सवर्ण व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद रखकर इस कानून का विरोध किया, जबकि अन्य वर्गों के व्यापारी खुले रहे। इस बंद के समर्थन में ब्राह्मण महासभा, क्षत्रिय महासभा, वैश्य समाज, कायस्थ और स्वर्णकार समाज जैसे संगठनों ने शहर में जुलूस निकालकर यूजीसी कानून वापस लेने की मांग की।
रामलीला मैदान से शुरू हुआ जुलूस महेश्वरी देवी मंदिर, चौक बाजार होते हुए छावनी चौराहे पहुंचा, जहां वक्ताओं ने अपने विचार रखे। राजा कृष्णकांत तिवारी ने कहा कि सवर्ण समाज की चुप्पी के कारण उन पर अत्याचार बढ़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सनातन और सवर्णों की बड़ी-बड़ी बातें करने वाली भाजपा सरकार सनातियों का अपमान कर रही है और सवर्णों के विरुद्ध यूजीसी जैसा काला कानून ला रही है। उन्होंने कहा कि सवर्णों के बच्चे अधिक अंक लाने के बावजूद नौकरी पाने में पीछे रह जाते हैं।
संकटा प्रसाद त्रिपाठी ने यूजीसी के विरोध में डटकर सामना करने और पीछे न हटने की अपील की, अन्यथा सवर्णों पर अत्याचार जारी रहने की चेतावनी दी। उन्होंने बताया कि सात फरवरी को हजारों की संख्या में सवर्ण समाज एकत्र होकर जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजेगा। जिसमें यूजीसी बिल को रद्द करने की मांग की जाएगी। नीरज तिवारी ने स्पष्ट किया कि सवर्ण समाज किसी दल का गुलाम नहीं है। क्षत्रिय महासभा के रमजोर सिंह चंदेल ने कहा कि उनका विरोध किसी पार्टी के विरुद्ध नहीं, बल्कि इस काले कानून के खिलाफ है, जो राष्ट्र और हिंदू समुदाय को विघटित करने वाला है। राजपूत करणी सेना के शिवकरण सिंह पप्पू ने हर अन्याय के विरुद्ध लड़ने की शपथ ली। अभिषेक बाजपेई ने कहा कि संघर्ष जारी रहेगा और एससीएसटी एक्ट के दुरुपयोग के बाद अब यूजीसी जैसा काला कानून लाया गया है।