कंप्यूटरीकृत राशन कार्ड प्रणाली लागू होने के बाद करीब एक लाख कार्ड धारक ऑनलाइन आवेदन के लिए साइबर कैफों की शरण में हैं।
लोगों के मुताबिक, यहां प्रत्येक कार्ड धारक से ऑनलाइन फार्म अपलोड करने के बदले 100 रुपये से अधिक वसूले जा रहे हैं। उधर, महिला मुखिया के नाम कार्ड बनने से अधिकांश महिलाओं के बैंक खाते न होना भी बाधा बन रहा है।
जिला पूर्ति कार्यालय द्वारा कोटेदारों के माध्यम से जमा कराए गए नए आवेदन पत्रों में लगभग 40 फीसदी फार्म रद्दी की गठरी में बंध गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, विकास भवन में ठेके पर कराई गई इन फार्मों की फीडिंग में तमाम नौसिखिया कंप्यूटर आपरेटरों ने ऐसी खामियां कर डाली जिससे इनकी अपलोडिंग कामयाब नहीं हो पाई।
नतीजे में एक लाख राशन कार्डों का कंप्यूटरीकृत नवीनीकरण नहीं हो पाया। अब कोटेदारों को सूची जारी किए जाने के बाद जिन उपभोक्ताओं के नाम इससे गायब हैं वह विकास भवन स्थित सप्लाई आफिस के चक्कर लगा रहे हैं। अब उन्हें आनलाइन आवेदन की सलाह दी जा रही है। वह भी कार्ड पुरुष के बजाए महिला मुखिया के नाम बनेगा।
उधर, प्रभारी जिला पूर्ति अधिकारी गौरव का कहना है कि जनसेवा केंद्रों के जरिए उपभोक्ता आवेदन अपलोड करा सकते हैं। इन केंद्रों में निर्धारित 20 रुपये लिए जाते हैं।