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यूपी से एमपी तक फर्जी पिटपास का खेल

Sun, 11 Oct 2015 11:48 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, बांदा
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बांदा। नकली पिटपास से अवैध खनन और खनिज ट्रांसपोर्टिंग का काला धंधा यूपी से एमपी तक चल रहा है। दोनों ही सूबों के अफसर यदा-कदा छापे मारकर फर्जी पिटपास पकड़ने और कुछ वाहनों को सीज कर देने की रस्म अदायगी कर खामोश हो जाते हैं। इससे दोनों सूबों की सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लग रहा है।
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यूपी के बांदा, चित्रकूट और महोबा व सीमावर्ती एमपी के पन्ना, सतना, छतरपुर जनपदों में बालू, मौरंग, पत्थर आदि का वैध और अवैध खनन पुराना पेशा है। इसमें काबिज कारोबारियों और माफियों के तार दोनों सूबों की सरकार में बैठे आला अफसरों से लेकर मंत्रियों तक जुड़े हैं।

यही वजह है कि सत्ता परिवर्तन के बाद भी खनन का कारोबार बदस्तूर चलता रहता है। अवैध खनन और ओवरलोडिंग के साथ ही दोनों सूबों की सरकार को हर माह करोड़ों रुपये के राजस्व की चपत देने का एक और धंधा चल रहा है। यह है नकली पिटपास के जरिये बालू की ढुलाई और उसी की आड़ में अवैध खनन का।
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हाल ही में मध्य प्रदेश के अजयगढ़ की तेज तर्रार तहसीलदार डा. बबिता राठौर ने अपने क्षेत्र की चंदौरा बालू खदान पर अचानक छापा मारा। यहां अवैध खनन हो रहा था। दो ट्रैक्टर रंगेहाथ पकड़े गए। नजदीक में खड़ी एक जीप में सवार लोग तहसीलदार की टीम को देखकर जीप छोड़कर भाग गए।

जीप की तलाशी में तहसीलदार ने पिटपास की गड्डी बरामद की। इसमें 16 पिटपास काटे जा चुके थे। 34 शेष थे। इन पर उत्तर प्रदेश सरकार की मुहर लगी थी। नौ घन मीटर लोडिंग की भी मुहर लगी थी। पिटपास ब्लैंक थे। इनमें किसी पट्टेधारक का नाम, भंडारण का स्थल, गाटा संख्या, अनुज्ञा विवरण, परिवहन किए जा रहे खनिज का नाम, मात्रा, कहां से कहां ले जाया जा रहा है? आदि कालम खाली थे।

तहसीलदार ने पिटपास की सत्यता के लिए खनिज विभाग से पता किया तो मालूम हुआ कि यह फर्जी है। मुहर भी नकली है। तहसीलदार ने बताया कि यह पास बाहर से प्रिंट कराए हुए नकली प्रतीत हो रहे हैं। कटे हुए 18 पिटपास पर भी किसी का नाम नहीं है।

अगली कार्रवाई के लिए एसडीएम अजयगढ़ को यह प्रकरण भेजा गया। पकड़ी गई जीप पुलिस ने अपने कब्जे में ले ली है। उधर, बांदा के खनिज अधिकारी ने बताया कि हाल ही में कालिंजर थाना क्षेत्र में फर्जी पिटपास से बालू की ढुलान कर रहे पांच लोगों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।

पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। उधर, बांदा के एडीएम डीएस पांडेय ने मध्य प्रदेश के पन्ना शासन को भेजी रिपोर्ट में अवगत कराया है कि अजयगढ़ में पकड़े गए पिटपास बांदा खनिज विभाग से जारी नहीं हुए हैं।
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