बरियारपुर (बांदा)। दोनों सूबों के अभियंताओें के आने की खबर पाकर बांध की भूमि के पट्टा धारक सुबह से ही बांध में आकर डट गए। इनमें आदिवासी और बूढ़े गरीब ज्यादा थे। पट्टा धारकों ने गुहार लगाई कि जमीन गई तो उनका जीवन भी जा सकता है।
पट्टा धारक रामकृपाल, धनीराम, मनी कोंदर, रामचरन, हरदास, पप्पू फदाली, दयाराम, मनोज कुमार और देवीदीन आदि ने बताया कि उनके पुरखों के समय से यह भूमि उन्हें पट्टे पर मिलती रही है। इसी से गुजारा हो रहा है। एमपी के दबंगई के आगे अब तक खामोश रहे पट्टेधारक यूपी के अधिकारियों और मीडिया को देखकर विरोध जताने का साहस जुटा सके।
उन्होंने बताया कि यह नहर यहां से एक किलोमीटर दूर भपूतपुर कुर्मियान से निकाली जानी थी, लेकिन अब इसे बदलकर यहां उनकी पट्टे की भूमि पर ले आया गया है। उधर, बांदा सिंचाई प्रखंड अधिशासी अभियंता योगेश रावल ने बताया कि बरियारपुर में यूपी की 285 हेक्टेअर जमीन है। इसी में बरियारपुर बांध भी है। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश ने अपनी नई नहर के लिए 5.15 हेक्टेअर यूपी की जमीन ले ली है। बरियारपुर बांध से अपने हिस्से का पानी लेने के लिए मध्य प्रदेश पहले से ही बरियारपुर बांध में नहर बनाए है।
बरियारपुर (बांदा)। ‘हमार लाने तो तुम भगवान बनकै आए हऊ, यहैं के अफसर हमार पुश्तैनी जमीन छीन लीन्हे, पति भगवान के घरै चलोगा, अब यह जमीन से गुजारा चलत तै, विरोध करै पर एमपी के अधिकारी हमका डरा दीन्हैं’।
यह बात बरियारपुर की पट्टाधारक 65 वर्षीय किशुनिया ने शुक्रवार को बरियारपुर में यूपी के अभियंताओं और मीडिया के पहुंचने पर कही। उसने बताया कि जमीन पर नहर न बनाने के लिए कई दिनों तक लगातार आरजू, मिन्नत की। गिड़गिड़ाई। मगर एमपी वालों ने एक न सुनी। जमीन वापस मिल जाए तो उसका गुजारा फिर हो जाएगा।