बांदा। बुंदेलखंड के पन्ना टाइगर रिजर्व के बाघ और अन्य जीव-जंतुओं एवं लाखों पेड़-पौधों को बचाने की पैरवी परवान चढ़ रही है। बच्चों और आम आदमी से लेकर अब राजघराने भी इसमें कूद पड़े हैं। मध्यप्रदेश के साथ उत्तर प्रदेश के स्वयंसेवी संगठन और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी केन-बेतवा लिंक को बुंदेलखंड की भाग्य रेखा कहे जाने वाली केन नदी के लिए डेथ वारंट बताया है।
करीब 17 वर्ष पूर्व स्वीकृत हुई केन-बेतवा लिंक परियोजना ने पिछले माह विश्व जल दिवस के मौके पर उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्रियों ने एमओए (मेमोरेंडम आफ एग्रीमेंट) में हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसी के बाद इस परियोजना से असहमत संगठन और नागरिकों ने इसका विरोध भी तेज कर दिया है। विरोध के स्वर उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश दोनों राज्यों में ही गूंज रहे हैं। अलबत्ता ज्यादा तेजी बुंदेलखंड के पन्ना जनपद (मध्यप्रदेश) में नजर आ रही है।
अभी हाल ही में होली के दिन पन्ना टाइगर सपरिवार आए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को बच्चों ने तख्तियां लेकर पन्ना टाइगर के पेड़ बचाने की फरियाद की थी। अब पन्ना राजघराने की राजमाता दिलहर कुमारी भी पन्ना टाइगर रिजर्व को बचाने के लिए आगे आ गईं हैं। उन्होंने केन-बेतवा लिंक परियोजना का प्रतिरोध किया है। राजमाता के हाथों में केन-बेतवा प्रोजेक्ट रोकने की तख्ती के साथ उनका फोटो मीडिया में वायरल हुआ है।
कांग्रेसियों ने सांसद को दिया ज्ञापन
कांग्रेस नेताओं ने भी केन-बेतवा लिंक परियोजना का विरोध किया है। मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड से मिल रही खबरों के मुताबिक, बीते शनिवार को कांग्रेस नेताओं के जत्थे ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष/खजुराहो सांसद बीडी शर्मा को पन्ना में ज्ञापन सौंपा। इसमें पन्ना टाइगर रिजर्व के लिए केन-बेतवा लिंक को घातक बताया गया है।
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फोटो परिचय-8- आशीष सागर दीक्षित।
पन्ना टाइगर को उजाड़ने का एजेंडा
केन-बेतवा नदी गठजोड़ नहीं, बल्कि केन नदी की हत्या और पन्ना टाइगर रिजर्व को उजाड़ने का एजेंडा है। केन-बेतवा नदियों पर पहले से ही लगभग 22 बांध बने हुए हैं। उसके बाद भी बुंदेलखंड में पानी का जो हस्र है वह सामने है। यह परियोजना पर्यावरण के लिए विनाशकारी प्रयोगशाला साबित हो सकती है।
-आशीष सागर दीक्षित, आरटीआई एक्टिविस्ट
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फोटो परिचय-9- कुलदीप शुक्ला।
10 हजार आदिवासी होंगे प्रभावित
केन-बेतवा लिंक परियोजना से 10 हजार आदिवासी आबादी प्रभावित होगी। परियोजना पर सर्वे के दौरान स्थानीय बाशिंदों और आदिवासियों से राय ली जानी चाहिए थी। बंद कमरों में बैठकर बड़े फैसले लेना लोगों के साथ अन्याय है। इतनी ताकत और बुद्धि बुंदेलखंड राज्य बनाने में लगाई जाती तो पिछड़ापन दूर होता।
-कुलदीप शुक्ला, आरटीआई एक्टिविस्ट
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फोटो परिचय-10- रामबाबू तिवारी
केन और सहायक नदियां मृत हो जाएंगी
केन-बेतवा लिंक परियोजना से पन्ना टाइगर रिजर्व डूबेगा। वहां से बाघों को विस्थापित करना होगा। इससे ईको सिस्टम अस्त-व्यस्त हो जाएगा। बरियारपुर डैम के ऊपर बांध बनाने से केन नदी मृत हो जाएगी। बांदा तक पानी नहीं आएगा। केन की सहायक नदियां और यमुना नदी भी प्रभावित होगी।
-रामबाबू तिवारी, शोध छात्र