बांदा। डॉन, माफिया, गैंगस्टर जैसे अपराधों में चर्चित बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी की खानदानी विरासत भी है। आधा सैकड़ा संगीन आरोपों वाले मुकदमों के मुल्जिम मुख्तार का पारिवारिक इतिहास गौरवशाली रहा है। इनके दादा मुख्तार अंसारी देश की आजादी से पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष रहे, जबकि नाना ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान महावीर चक्र विजेता थे।
देश के उप राष्ट्रपति रह चुके हामिद अंसारी इनके सगे चाचा हैं। राजनीतिक पृष्ठभूमि में एक भाई सांसद, जबकि दूसरा भाई पूर्व विधायक है। पुत्र दुनिया के टॉप-10 शूटरों में शामिल हैं। पिछले करीब डेढ़ दशकों से अपराध जगत में तेजी से चर्चित हुए मुख्तार अंसारी और उनका खानदान उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के मूल बाशिंदे हैं। मुख्तार अंसारी मौजूदा समय में पांचवीं बार उत्तर प्रदेश विधान सभा के सदस्य/विधायक हैं। बाहुबली अंसारी ने पहला चुनाव बसपा से वर्ष 1996 में जीता।
इसके बाद 2002, 2007, 2012 व 2017 में मौजूदा विधायक हैं। ये सभी चुनाव मऊ विधानसभा क्षेत्र से ही जीते। 2009 में बसपा से लोकसभा का चुनाव लड़ा, लेकिन पराजित हो गए। वर्ष 2010 में बसपा ने मुख्तार अंसारी को पार्टी से निष्कासित कर दिया। इसी के बाद उन्होंने कौमी एकता दल गठित कर लिया। वर्ष 2017 में अपने इस दल का बसपा में विलय कर दिया और बसपा उम्मीदवार के रूप में पांचवीं बार विधानसभा चुनाव जीता।
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34 माह शांत गुजरे, 14 माह बाद अब हौव्वा
पूर्व में मुख्तार अंसारी को लेकर यहां नहीं थी हायतौबा
वज्र वाहन के साथ गिनीचुनी पुलिस जाती थी पेशी में
विकास दुबे एनकाउंटर के बाद सुरक्षा ने पकड़ा तूल
अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। 14 माह पहले इसी बांदा जेल में बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी करीब 34 माह तक रहे। तब सुरक्षा का हौव्वा इतना नहीं था, जितना इस बार है। मौजूदा योगी सरकार में ही मुख्तार अंसारी बांदा जेल में थे। इसी सरकार में उन्हें पंजाब भेजा गया। अब इसी सरकार की पैरवी पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश से मुख्तार अंसारी को बांदा वापस लाया जा रहा है।
बाहुबली विधायक और गैंगस्टर मुख्तार अंसारी को लेकर मौजूदा समय में मचे सुरक्षा के शोर के पीछे शायद बिकरू कांड के आरोपी विकास दुबे का एनकाउंटर है। दूसरी तरफ प्रदेश सरकार द्वारा बड़े अपराधियों और माफियाओं पर कसे जा रहे शिकंजे की भी दलील दी जा रही है। बांदा जेल में 30 मार्च 2017 से 21 जनवरी 2020 तक निरुद्ध रहने के दौरान मुख्तार अंसारी को कई बार मुकदमों की पेशियों में प्रदेश के कई जनपदों में ले जाया जाता था। सुरक्षा के नाम पर पुलिस के वज्र वाहन के साथ मात्र एक छोटे चौपहिया वाहन में पुलिस बल जाता था।
गिनेचुने पुलिस कर्मी होते थे। कभी कोई बवाल नहीं हुआ, लेकिन इस बार इसी बांदा जेल में दोबारा लाए जाने पर जबरदस्त किलाबंदी की गई है। जेल के अंदर से लेकर बाहर तक और आसपास इलाके में जबरदस्त चौकसी और पुलिस का पहरा है। इस बाबत कोई भी पुलिस या जेल अधिकारी खुलकर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। सबका बमुश्किल एक ही जवाब है कि शासन से जो निर्देश मिले हैं, उस पर अमल हो रहा है।
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जेल से रिहा और आए बंदियों की छानबीन
बांदा। बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी को जेल में सुरक्षित रखने के लिए जेल और जिला प्रशासन कवायदें कर रहा है। जेल में मौजूदा समय में करीब 780 बंदी हैं। इन पर कड़ी नजर रखी जा रही है। उधर, पिछले एक हफ्ते के अंदर जेल से जमानत पर रिहा होने वालों का पूरा चिट्ठा तैयार किया जा रहा है। साथ ही एक हफ्ते के अंदर किसी भी मामले में जेल आए बंदियों की भी जांच-पड़ताल और उनकी खुफिया जानकारी जुटाई जा रही है। जेल के आसपास के मकानों में पता किया जा रहा है कि कोई बाहरी आदमी किराये पर आकर तो नहीं बसा? शहर में भी यही जांच हो रही है। मुख्तार अंसारी के समर्थक और गुर्गे पिछली बार भी यहां किराये के मकानों में रहते रहे हैं। उन पर भी नजर रखते हुए छानबीन चल रही है। (ब्यूरो)
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जेल में भी जारी रहती है मुख्तार की मुख्तारी
बांदा। बाहुबली और माफिया डॉन के रूप में शोहरत पाए मुख्तार अंसारी अपने निर्वाचन क्षेत्र/गृह जिले में राबिन हुड जैसी हस्ती के रूप में जाने जाते हैं। अंसारी की आमदनी का मूल जरिया ठेकेदारी, खनन, स्क्रैप, रेलवे में कांट्रैक्ट आदि बताए गए हैं। पिछली बार जेल में लंबे समय तक रहे मुख्तार से उनके जनपद/निर्वाचन क्षेत्र से आए तमाम लोग मुलाकात करते थे। उस दौरान कई लोगों ने अपना नाम छिपाते हुए बताया था कि मुुख्तार गरीबों की भरपूर मदद करता है। यहां जेल में भी उसने अपने क्षेत्र के तमाम जरूरतमंदों को शादियां आदि के लिए मदद की थी। लोग बताते हैं कि रोजाना खासी रकम मदद के रूप में लोगों को मिलती थी। अपने निर्वाचन क्षेत्र में विधायक निधि के अलावा अपनी आमदनी से विधायक मुख्तार ने स्कूल-कालेज आदि बनवाए हैं। (ब्यूरो)
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माननीयों और माफिया का ठिकाना बैरक 15
बांदा। जेल की बैरक नंबर 15 माननीय और माफिया के लिए ही आरक्षित होकर रह गई है। बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी से पहले भी इस बैरक में कई बाहुबली और माननीय मेहमान बन चुके हैं। इनमें कुंडा निवासी पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजाभइया, प्रयागराज का पूर्व सांसद अतीक अहमद, शामली के विधायक सुरेश राणा, ग्रेटर नोएडा का अनिल दुजाना और हरियाणा का सिंहराज भाटी आदि शामिल हैं। जेल के प्रभारी अधीक्षक प्रमोद तिवारी का कहना है कि सुरक्षा की दृष्टि से यह बैरक ठीक है। (ब्यूरो)
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मुख्तार की मेहरबानियों से खुश हैं बंदी
बांदा। प्रशासन और पुलिस भले ही मुख्तार अंसारी के पुन: बांदा जेल आने पर चिंतित हो, लेकिन जेल के अंदर का माहौल इससे उलट है। सूत्रों के मुताबिक, जेल के अधिकांश बंदी व कर्मचारी बाहुबली की वापसी से खुश हैं। इसकी वजह यह बताई गई कि पिछली बार करीब 34 महीने यहां रहे मुख्तार ने बंदियों और जेल कर्मियों से किसी तरह की बदसलूकी नहीं की। बताते हैं कि त्योहारों आदि के मौके पर मुख्तार बंदियों आदि पर खास मेहरबान होता था। जेल की कैंटीन आदि से सामान खरीदकर अपने पैसे से पूड़ी-सब्जी और खीर आदि बनवाता था। जरूरतमंद बंदियों को आर्थिक मदद भी मिलती थी। इन सभी कामों ने बंदियों के दिल में मुख्तार के प्रति हमदर्दी पैदा कर दी। (ब्यूरो)
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बैरक की घेराबंदी से बंदी नाखुश
बांदा। मुख्तार की बैरक नंबर 15 के इर्दगिर्द जेल प्रशासन ने कंटीले तार लगाकर बैरिकेडिंग कर दी है, ताकि अन्य बैरकों के बंदी इस बैरक तक न पहुंच पाएं। जेल प्रशासन ने यह कदम सुरक्षा की दृष्टि से उठाया है, लेकिन अधिकांश बंदियों को यह घेराबंदी रास नहीं आ रही। सूत्रों के मुताबिक, तमाम बंदियों ने इसका विरोध भी किया है। कहा कि जब मुख्तार को दिक्कत नहीं है, तो जेल प्रशासन क्यों परेशान है। (ब्यूरो)
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जेल की क्षमता 558, बंद हैं 780 कैदी
बांदा। ब्रिटिश हुकूमत के दौरान 1860 में बनी बांदा जेल की क्षमता 558 बंदियों की है, लेकिन यह लगभग हमेशा ओवरलोड रहती है। मौजूदा समय में भी यहां 780 बंदी हैं। इन्हें जेल की कुल 15 बैरकों में रखा जाता है। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था भी प्रभावित होती है। (ब्यूरो)
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पिछली बार के डकैतों से नहीं होगा सामना
बांदा। मुख्तार अंसारी को अबकी जेल में लगभग एक दर्जन दस्युओं से सामना नहीं होगा। यह सब चित्रकूट जेल भेज दिए गए हैं। पिछली बार मुख्तार अंसारी के यहां बंद होने के दौरान यह सब बांदा जेल में ही थे। इनमें दस्यु ददुआ गिरोह के राधे उर्फ सूबेदार सिंह, तहसीलदार उर्फ गोटर सिंह, रोहिणी सिंह और ठोकिया गिरोह के ज्ञान सिंह, संग्राम सिंह, रोहिणी सिंह आदि शामिल थे। अब जेल में गंभीर अपराधियों के बंदियों में बांदा शहर में पंजाब आर्मरी में पड़ी डकैती के आरोपी मुख्य रूप से हैं। इनमें मुंबई के डी-2 गैंग का सुक्का पाचा आदि मुख्य हैं। (ब्यूरो)
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पुलिस चौकी भी सुरक्षा के घेरे में
बांदा। शहर के हरदौली, जरैली कोठी, क्योटरा आदि मोहल्लों की सुरक्षा का जिम्मा संभाले जेल पुलिस चौकी भी अब घेराबंदी में कैद हो गई है। जेल गेट के बाहर स्थित गैराज में पुलिस चौकी चल रही है। मुख्तार की आमद के मद्देनजर अब जेल सड़क किनारे स्थित पहला गेट ही आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया है। ऐसे में फरियादी पुलिस चौकी तक नहीं पहुंच पा रहे। उधर, मंगलवार को पुलिस की सख्ती के चलते जेल बंदियों के परिजन जरूरी सामान भी बंदियों तक पहुंचा सके। जेल कालोनी में रहने वाले परिवारों को भी दो दिन तक परिसर से बाहर आने-जाने पर पाबंदी लगा दी गई है। सिर्फ स्टाफ कर्मचारी ही बाहर आ-जा रहे हैं। (ब्यूरो)