मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से जिला प्रशासन साढ़े पांच अरब रुपये से ज्यादा जिन विकास योजनाओं का लोकार्पण और करीब 35 करोड़ रुपये की योजनाओं का शिलान्यास करा रहा है, उनमें अधिकांश पुरानी हैं।
6.55 करोड़ की लागत वाले जिन तीन बिजली सब स्टेशनों का लोकार्पण कराया जा रहा है, वे वर्ष 2012 और 2013 में चालू हो चुके हैं। मुख्यमंत्री मेडिकल कॉलेज कैंपस में बृहस्पतिवार को 5.86 अरब रुपये से ज्यादा परियोजनाओं का लोकार्पण करेंगे।
इनके शिलापट मुख्यमंत्री की जनसभा स्थल पर लगाए जा रहे हैं। इनका अनावरण करके लोकार्पण और शिलान्यास की रस्म अदा कराई जाएगी।
प्रशासन ने सीएम को खुश करने के लिए और अपनी पीठ थपथपाने के लिए 35 करोड़ की 18 परियोजनाओं का शिलान्यास और पांच अरब 86 करोड़ 30 लाख रुपये की योजनाओं का लोकार्पण कराने की तैयारी पूरी कर ली है। इनमें गिरवां, ओरन और मुरवल के तीन बिजली घर (सब स्टेशन) भी शामिल हैं।
लोकार्पण नई योजनाओं या विकास कार्यों का होता है, पर यह तीनों सब स्टेशन दो से ढाई वर्ष पुराने हैं। गिरवां में बना 33/11 केवी सब स्टेशन 20 अक्तूबर 2012 को चालू हो चुका है। इसमें आज तक फोन सुविधा नहीं है। तीन संविदा कर्मी सब स्टेशन चला रहे हैं। इसकी लागत 2.88 करोड़ रुपये है।
ओरन गांव में बना 33/11 केवी सब स्टेशन पहली मई 2013 को शुरू हो चुका है। इससे 40 गांवों को आपूर्ति की जा रही है। इसकी लागत 2.26 करोड़ रुपये है। इसी तरह मुरवल गांव में बना 33/11 केवी सब स्टेशन 19 अक्तूबर 2014 को चालू हो चुका है। इससे 12 गांवों को बिजली आपूर्ति की जा रही है। इसकी लागत 1.41 करोड़ रुपये है।
गिरवां का सब स्टेशन तो इतना पुराना हो चुका है कि इसके दो फीडर गिरवां और बांसी काफी अरसे से खराब पड़े है। इन्हें अभी चालू नहीं किया गया। बड़ोखर बुजुर्ग गांव में राजकीय हाईस्कूल का भी सीएम के हाथों लोकार्पण कराया जा रहा है भवन में अभी तक लैट्रिन/बाथरूम नहीं बने हैं। यह हैंडओवर भी नहीं हुआ है।
और तो और यहां बिजली की फिटिंग तक नहीं है। इसकी लागत 51.98 लाख रुपये है। इसे यूपी स्टेट कांस्ट्रक्शन एंड इंफ्राइंस्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन ने बनाया है। कमोवेश यही स्थिति मुख्यमंत्री के हाथों कराए जा रहे शिलान्यास वाले कामों की है। तमाम भवन और सड़कें इत्यादि का काम काफी समय पूर्व शुरू हो चुका है, लेकिन उनका ‘शिलान्यास’ अब कराया जा रहा है।
चालू नहीं की गई इकलौती एक्सरे मशीन
बांदा। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव नवनिर्मित मेडिकल कॉलेज का उद्घाटन भले ही कर दें, पर यहां अभी जिला अस्पताल जैसी सुविधाएं भी मरीजों को मुहैया नहीं हो सकेंगी। यहां लाई गई इकलौती एक्सरे मशीन अभी तक लगाई नहीं गई है।
संविदा पर तैनात किए गए रिटायर और प्राइवेट डॉक्टर पिछले दो दिनों से ओपीडी मरीजों को देखने की रस्म अदा कर रहे हैं। बुधवार को 143 मरीजों ने यहां अपना पंजीकरण कराया। इनमें ज्यादातर मेडिकल कॉलेज में काम करने वाले मजदूर और उनके परिजन थे।
फिलहाल चार-चार बेड के दो वार्ड सीएम को दिखाने के लिए तैयार कर दिए गए हैं। मेडिकल कॉलेज में न तो अल्ट्रासाउंड मशीन है, न तो ईसीजी सुविधा। पैथालॉजी भी नदारद है।
स्ट्रीट लाइट के खंभे सपाई रंग में रंगे
बांदा। मेडिकल कॉलेज की इमारत को सीएम के स्वागत में जमकर सजाया गया है। उधर, परिसर में लगाई गई स्ट्रीट लाइट के खंभे सपा के झंडे वाले रंग में रंगे गए हैं।
मजेदार बात यह है कि कार्यदाई संस्था ने इन खंभों को नीले रंग में पेंट करा दिया था। किसी ने इस पर यह कहकर आपत्ति कर दी कि यह बसपाई कलर है। नतीजा यह हुआ कि सभी खंभों को दोबारा सपाई कलर में पोता गया।
सुरक्षा में ‘भरपूर’ पुलिस बल
बांदा। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को बखूबी निपटाने के लिए भारी सुरक्षा का बंदोबस्त किया गया है। व्यवस्था के तहत पांच अपर पुलिस अधीक्षक, 12 पुलिस उपाधीक्षक, 22 इंस्पेक्टर, 100 उप निरीक्षक, 450 सिपाही, 60 हेड कांस्टेबल, दो महिला उप निरीक्षक, 25 महिला कांस्टेबल और पांच कंपनी पीएसी मेडिकल कॉलेज कैंपस और आसपास लगाई गई है।