(शिक्षक दिवस पर विशेष)
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बांदा। जिंदगी में तमन्ना थी कि बेटियां पढ़े और आत्मनिर्भर बनें। ऐसा ही कुछ कर दिखाया शहर की बहू व छत्तीसगढ़ की बेटी वनमाला चौहान ने। वनमाला चौहान ने छत्तीसगढ़ के बैकुंठपुर प्राइमरी कालेज में शिक्षक थीं। 1978 में उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ दी। ससुराल बांदा आकर स्टेशन रोड में शिशु से कक्षा पांच तक स्कूल खोला और गरीब बेटियों को निशुल्क शिक्षा दी। 2007 में पति रामकिशोर का निधन हो गया, लेकिन वनमाला ने पांच बेटियों व दो बेटों का बड़ा परिवार होने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी। बच्चों को भी पालती रही और गरीब बेटियों को शिक्षा भी देती रहीं।
खुद भी आगे की शिक्षा लेती रहीं। 1999 में हाईस्कूल व 2004 में इंटर कालेज खोला। आज वह 15 बेटा-बेटियों को शिक्षा दे रहीं हैं। इसी बीच 1982 में उनका पीसीएस में नाम आ गया। स्कूल की बच्चियों के प्रेम में उन्होंने पीसीएस भी छोड़ दिया। यूं तो स्कूल में एक दर्जन शिक्षक हैं, लेकिन 70 साल की उम्र में वह आज भी बच्चों को एक घंटा खुद पढ़ाती हैं और स्कूल की व्यवस्थाओं पर भी नजर रखती हैं। उनका कहना है कि जब तक वह जिंदा है तो कोई बच्ची रुपयों के अभाव में इंटर तक की शिक्षा से वंचित नहीं रहेंगी।
गरीब बच्चियों की दुआएं ही है कि आज पुलिस लाइन के पास उनका आदर्श इंटर कालेज खुद के भवन में चल रहा है और एक दर्जन शिक्षकों का परिवार पल रहा है। कहा कि जीवन में शिक्षा व संस्कार बहुत जरूरी है। जिसके पास यह दोनों है तो उसे किसी चीज की कमी नहीं हो सकती है। वह खुद दूसरों की भलाई, पढ़ाई आदि में मदद कर सकता है।
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फोटो 10- शिक्षक रश्मि अग्रवाल।
फोटो11 - दो अक्टूबर पर स्कूल में राष्ट्रपिता की दंडी यात्रा का मंचन करते बच्चें। फाइल फोटो
शिक्षिका रश्मि को मिलेगा उत्कृष्ट कार्य के लिए राज्य पुरस्कार
शिक्षक दिवस पर लोक भवन में सम्मानित होगीं शिक्षिका
शिक्षिका ने शिक्षा सहित खेल में बच्चों को बनाया बेहतर
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। बडोखर ब्लाक के उच्च प्राथमिक स्कूल जारी भाग-1 की विज्ञान की शिक्षिका रश्मि अग्रवाल को बेसिक शिक्षा विभाग में उत्कृष्ट कार्य के लिए राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए चयनित गया है। यह सम्मान शिक्षक दिवस (शुक्रवार) को लोकभवन लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व शिक्षा मंत्री अपने हाथों से देंगे। उनकी शिक्षण क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। हालांकि वह इसके पहले कई बार विभिन्न मंचों पर सम्मानित हो चुकी हैं।
शहर के बन्योटा मोहल्ले की रहने वाली रश्मि 1999 में सेवा में आईं थीं। 9 अगस्त 2012 को को पिपरी से उनका स्थानांतरण उच्च प्राथमिक स्कूल जारी कर दिया गया। वह कहती है कि जब वह जारी आईं तो यहां के बच्चों का शिक्षा ही नहीं खेल के क्षेत्र में स्तर शून्य था। यहां तक कि एक भी बच्ची स्कूल में नहीं पढ़ती थी। उन्होंने गांव में धूम-घूमकर अभिभावकों को बच्चियों को पढ़ाने व स्कूल में दाखिला कराने के लिए प्रेरित किया।
आज स्कूल में 50 से बच्चियां शिक्षा प्राप्त कर रहीं हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों से जुडाव बनाने के बाद न केवल उन्हें आईसीटी नवाचार के माध्यम से शिक्षा में काबिल बनाया बल्कि खेल के क्षेत्र में भी बच्चों ने बेहतर प्रदर्शन कर स्कूल का नाम रोशन किया। वह कहती है कि गरीब बच्चों को बेहतर बनाने के लिए स्कूल की छुट्टी के बाद वह एक घंटे पढ़ाई में कमजोर बच्चों को पढ़ाने व खेल के लिए 30 मिनट का अतिरिक्त समय देतीं हैं।
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शिक्षक की उपलब्धियां-
-वर्ष 2024 में कला, क्राफ्ट, पपेट्री प्रतियोगिता में विज्ञान विषय में राज्य स्तर का पुरस्कार मिला।
-वर्ष 2025 को सप्तम राज्य स्तरीय कहानी सुनाओं प्रतियोगिता में राज्य स्तर पर पुरस्कार मिला।
-वर्ष 2024 में एडूलीडर्स यूपी अवार्ड व राष्ट्रीय स्तर पर डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन सम्मान मिला।
-वर्ष 2024 को गिजुभाई बधेका राष्ट्रीय शिक्षक और राज्य स्तर पर शक्ति स्वरूपा सम्मान मिला।
-वर्ष 2024 को जिला स्तर पर आदर्श शिक्षक और डीएम से उत्कृष्ट नवाचारी शिक्षक सम्मान मिला।
-वर्ष 2025 में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर जिला स्तर पर उत्कृष्ट ब्लाक नोडल सम्मान मिला।
-वर्ष 2025 को राष्ट्रीय स्पर साझा काव्य संग्रह व लेख प्रकाशन के लिए सम्मानित किया गया।
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छात्र उपलब्धियां-
-वर्ष 2016-17 में छात्र व छात्राओं को मंडल स्तर पर इंस्पायर अवार्ड।
-वर्ष 2021 से तीन साल तक जिला स्तर पर राष्ट्रीय आविष्कार सम्मान।
-वर्ष 2022-23 में यातायात पर जिला स्तर पर चित्रकला सम्मान मिला।
-नवोदय क्रांति परिवार में राष्ट्रीय स्तर पर रक्षा सूत्र सम्मान से नवाजा।
-काकोरी ट्रेन एक्शन निबंध प्रतियोगिता में जिला स्तर पर सम्मान मिला।
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फोटो 10- शिक्षक रश्मि अग्रवाल।
फोटो 10- शिक्षक रश्मि अग्रवाल।