बांदा। टोल बैरियर के विरोध में ट्रांसपोर्टरों की
देशव्यापी हड़ताल में बुंदेलखंड में भी ज्यादातर ट्रकों के पहिये थम गए।
बृहस्पतिवार को हड़ताल का पहला दिन था। उधर, बिजली विभाग के अवर अभियंताओं
ने भी ग्रेड-पे के लिए 48 घंटे की हड़ताल और उपवास शुरू कर दिया।
इस
बीच बिजली का कोई भी फाल्ट दुरुस्त नहीं कराएंगे। फिलहाल प्रशासन और बिजली
विभाग यह मानकर खामोश हैं कि दोनों ही हड़तालों की मांगें केंद्र और राज्य
सरकारों से संबंधित है। हड़ताल लंबी खिंची तो प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था
करेगा।
जनपद में ज्यादातर खाद्य वस्तुएं और दवाएं कानपुर, लखनऊ सहित
विभिन्न जनपदों से आती हैं। सब्जी की आवक भी बाहरी जनपदों से होती है।
ट्रांसपोर्टरों की मानें तो हर रोज करीब 400 टन सब्जी, कास्मेटिक, दवाएं और
रोजमर्रा में प्रयोग होने वाली चीजें जिले में ट्रकों के जरिये आती हैं।
हड़ताल
लंबी खिंची तो दवा, सब्जी और कई अन्य जरूरी चीजों की किल्लत हो सकती है।
बुंदेलखंड में सबसे ज्यादा असर मौरंग, बालू और गिट्टी पर पड़ेगा।
चित्रकूटधाम मंडल के बांदा, हमीरपुर, महोबा व चित्रकूट से रोजाना एक हजार
से ज्यादा ट्रक ये खनिज संपदा लेकर आते-जाते हैं।
बिल्डिंग
मैटेरियल की आवक रुकने से मकान का निर्माण करा रहे लोगों को परेशानी हो
सकती हैं। ट्रक आपरेटर एसोसिएशन जिलाध्यक्ष राजकुमार गर्ग ने दावा कि पहले
ही दिन जनपद में लगभग एक हजार ट्रकों के पहिये थम गए हैं।
उधर,
जूनियर इंजीनियर संघ की 48 घंटे की हड़ताल शुरू हो गई है। इस दौरान वे
फाल्ट नहीं दुरुस्त कराएंगे। बांदा मुख्यालय समेत गांवों में रोजाना
फाल्टों की भरमार रहती है। मरम्मत न होने पर शहर और गांवाें में बिजली संकट
गहरा सकता है।