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कोषाधिकारी और लेखाधिकारी पर चलेगा केस

Thu, 27 Aug 2015 11:28 PM IST
रशीद सिद्दकी /अमर उजाला,बांदा
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विश्व बैंक की ओर से प्राथमिक स्कूलों के लिए दिए गए बजट में 42,74,649 रुपये के गबन के मामले की फाइल फिर खुल गई है। अब बांदा के तत्कालीन मुख्य कोषाधिकारी और बेसिक शिक्षा विभाग के तत्कालीन वित्त एवं लेखाधिकारी पर केस चलेगा। शासन ने इसकी मंजूरी दे दी है।
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करीब डेढ़ दशक पुराने इस मामले में तत्कालीन मंडलायुक्त ने तत्कालीन डीएम, बीएसए, सीडीओ सहित 10 अफसरों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने का आदेश दिया था।

बांदा जिले में वर्ष 2001 में प्राथमिक विद्यालयों में सामान खरीदने के लिए विश्व बैंक परियोजना से बजट मिला था। इसमें 42लाख 74 हजार छह सौ 49 रुपये के गबन का मामला सामने आया।

तत्कालीन सीडीओ और सिटी मजिस्ट्रेट की जांच के बाद तत्कालीन मंडलायुक्त ने उस वक्त जिले में कार्यरत रहे डीएम के रवींद्र नायक, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी नरेंद्र शर्मा, सीडीओ एसयू अंसारी, मुख्य कोषाधिकारी डॉ. केदार सिंह, वित्त एवं लेखाधिकारी (बेसिक शिक्षा) मोहन अग्रवाल, एबीएसए नर्वदा प्रसाद व जगदंबा प्रसाद मिश्र, प्रति उप विद्यालय निरीक्षक जानकी प्रसाद त्रिपाठी, बीएसए के प्रधान लिपिक अमीर बख्श नजमी और राज्य कर्मचारी कल्याण निगम के प्रबंधक राजेश कुमार अग्रवाल आदि के खिलाफ एफआईआर के आदेश दिए।
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शिकायतकर्ता शिक्षक नेता कामना प्रताद मिश्र की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज हुई। प्रदेश सरकार ने तत्कालीन डीएम रवींद्र नायक समेत चार अधिकारियों के विरुद्ध न्यायालय में मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं दी। अलबत्ता अन्य अधिकारियों पर मुकदमा चला। इस बीच कई जेल गए और जमानत पर छूटे।

अब इनमें ज्यादातर सेवानिवृत्त हो चुके हैं। लगभग डेढ़ दशक के बाद शासन ने गबन के मामले में दोबारा सुध ली। बीते 21 अगस्त को प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव (वित्त) राहुल भटनागर ने राज्यपाल के आदेश का हवाला देकर शासनादेश जारी किया।

इसमें आरोपी तत्कालीन मुख्य कोषाधिकारी डॉ. केदार सिंह और तत्कालीन वित्त एवं लेखाधिकारी मोहन अग्रवाल के विरुद्ध न्यायालय में मुकदमा चलाने की स्वीकृति दी गई है। यह आदेश बांदा जिलाधिकारी को प्राप्त हो गया है। इस पर अभियोजन विभाग कार्रवाई कर रहा है। बताया जाता है कि यह दोनों ही अधिकारी अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
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