बांदा। मानसिक रोग विभाग की टीम ने गुरुवार को डायट
में कैंप लगाकर प्रशिक्षु शिक्षकों को मानसिक रोग के लक्षण और बचाव के उपाय
बताए।
प्रशिक्षुओं ने मानसिक रोगों के बारे में सवाल किए। मनोरोग
विशेषज्ञों ने बताया कि रोजमर्रा के तनाव से यह बीमारी कब लग जाए? पता भी
नहीं चलता।
जिला अस्पताल की साइकोलॉजिस्ट डॉ. रिजवाना हाशमी ने
बताया कि मानसिक रोग कभी किसी को भी हो सकता है। इसके लक्षणों में रोगी
बहुत अकेलापन महसूस करता है।
कुछ लोग अत्यधिक सफाई रखते हैं तो कुछ
लोग चीजों को रखकर भूल जाते हैं। डॉ. हरदयाल ने कहा कि रोजमर्रा के तनाव
से यह बीमारी कब लग जाती है पता नहीं चलता।
आगे यही विकराल रूप ले
लेता है। यदि भूलने की स्थिति आ जाए या अकेले में रहने का मन करे तो समझ
लें कि मानसिक रोग से ग्रस्त हो रहे हैं।
तुरंत मानसिक रोग
विशेषज्ञ से संपर्क कर समय से पूरा इलाज लें। मानीटरिंग आफिसर नरेंद्र
कुमार मिश्रा ने बताया कि मानसिक रोग निवारण के लिए जिला अस्पताल के मानसिक
विभाग में सोमवार, बुधवार व शुक्रवार को ओपीडी तथा अन्य तीन दिन फील्ड
विजिट का कार्यक्रम किया जा रहा है।
सोशल वर्कर नंदिनी कुरील,
त्रिभुवन नाथ, नर्स कीर्ति प्रभा पाल, अनुपम त्रिपाठी भी मौजूद रहे। डायट
प्राचार्य डा. एके त्रिपाठी ने सहयोग किया।