बांदा। ई-रिक्शों ने शहर की यातायात व्यवस्था धड़ाम कर दी। त्योहार की तैयारी में बाजार और स्टेशन व बस स्टैंड जाने वाले लोगों को घंटों जाम से जूझना पड़ा। स्कूल बसें, एंबुलेंस और स्वर्गारोहण वाहनों को भी जाम से दो-चार होना पड़ा। जाम खुलवाने में ट्रैफिक पुलिस के पसीने छूट गए।
जिला प्रशासन, पुलिस, नगर पालिका और परिवहन विभाग के सभी कायदे कानून ई-रिक्शा चालकों के सामने बेमतलब साबित हो रहे हैं। दो साल पहले यहां तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक के सत्यनारायण के निर्देश पर पुलिस अधीक्षक शालिनी सिंह ने शहर के सभी प्रमुख चौराहों और पुलिस चौकियों के नजदीक ठेलिया और पटरी दुकानों हटाकर ई-रिक्शा स्टैंड बनवाएं थे। हर ई-रिक्शा के लिए संबंधित चौराहे से सवारी लेने को रूट निर्धारित था। यहां तक कि बलखंडी नाका से गूलर नाका तक, चौक बाजार में ई-रिक्शा प्रवेश वर्जित था। उनके जाते ही यह व्यवस्था धड़ाम हो गई। सोमवार को चौक बाजार में रक्षाबंधन को सजी दुकानों में भीड़ के चलते ई-रिक्शों ने जाम की स्थिति पैदा कर दी। लोगों का पैदल निकलना मुश्किल हो गया।
कालू कुआं चौराहा से बाबूलाल चौराहा ओवर ब्रिज तक व डीआईओएस कार्यालय से पीली कोठी तक, अमर टाकीज चौराहा, जिला परिषद चौराहा, स्टेशन रोड में दिनभर कई बार घंटों जाम लगा। पुराने रेलवे ओवर ब्रिज व बस स्टैंड के सामने ट्राफिक पुलिस के जवान दिन भर जाम खुलवाने को मशक्कत करते रहे। इसके बाद भी घंटों जाम नहीं खुलवा सके। ओवरब्रिज में स्कूल बस, एंबुलेंस आदि वाहन फंसे रहे।
खोया मंडी में दो, 50 किलो खोया छोड, भूरागढ़ में दो दूध के नमून क्वालिटी स्वीट, भानू चौाराह, कधईरूा स्वीट लड्डू के नमूने लिए गए।