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शहर में नहीं नजर आती ट्रैफिक पुलिस

Wed, 04 Nov 2015 11:44 PM IST
ब्यूूराे/अमर उजाला, बांदा
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बांदा। मंडल मुख्यालय बांदा में ज्यादातर सड़कों  और चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस नहीं नजर आती है। चारों जिलों में ट्रैफिक पुलिस की जबरदस्त कमी है। दो चार सिपाही उन्हीं रूट पर नजर आते हैं जिन रूटों से अफसरों की गाड़ियां गुजरती हैं। शहर में 24 ट्रैफिक प्वाइंट हैं। इन पर किसी की तैनाती नहीं है। नवंबर यातायात माह के रूप में मनाया जा रहा है लेकिन ट्रैफिक व्यवस्था में कोई सुधार नहीं है।
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चित्रकूटधाम मंडल गठन के डेढ़ दशक बाद भी यहां ट्रैफिक व्यवस्था पटरी पर नहीं आई। रोजाना हो रहे सड़क हादसों की मुख्य वजह यही है। मुख्यालय में ट्रैफिक प्वाइंट के हिसाब से सिपाहियों व दरोगा की तैनाती नहीं है। पुलिस के आला अफसरों पर निर्भर है कि वह कब किस खाकी वर्दी वाले सिपाही को ट्रैफिक पुलिस की सफेद ड्रेस पहना दें।

डीआईजी दफ्तर से मिले आंकड़ों के मुताबिक मंडल मुख्यालय में 11 ट्रैफिक कांस्टेबल व एक टीएसआई तैनात हैं। इसमें भी घटते-बढ़ते रहते हैं। अक्सर व्यस्ततम चौराहों पर होमगार्ड या पीआरडी जवान डंडे पटकते नजर आते हैं। ट्रैफिक सिपाही उन्हीं मार्गों पर सुबह-शाम उतनी देर के लिए ड्यूटी पर नजर आते हैं जहां से और जिस वक्त अफसरों को गुजरना होता है। यातायात माह होने के बावजूद ट्रैफिक सुधार के लिए कोई खास उपाए या कारगुजारी नजर नहीं आ रही।  
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तीनों जनपदों में भी ट्रैफिक व्यवस्था टेढ़ी खीर
बांदा। मंडल के अन्य जनपदों मेें भी ट्रैफिक पुलिस व्यवस्था चरमराई हुई है। तीर्थ स्थली चित्रकूट में मात्र 9 ट्रैफिक सिपाही और एक टीएसआई पर ट्रैफिक व्यवस्था का दारोमदार है। जबकि यहां आए दिन भारी तादाद में तीर्थ यात्री और उनके वाहनों का आवागमन होता है। महोबा व हमीरपुर शहर में 8-8 कांस्टेबल और एक टीएसआई तैनात हैं। तीनों जनपदों में 18-18 ट्रैफिक प्वाइंट हैं।

अवैध टैक्सी स्टैंड आमदनी का जरिया
बांदा। शहर के संकटमोचन, रोडवेज बस स्टैंड के आसपास, ओवरब्रिज कलेक्ट्रेट गेट से आरटीओ दफ्तर तक, ईदगाह चौराहा में ओवरब्रिज से लेकर खूंटी चौराहे तक, चमरौटी चौराहा, महाराणा प्रताप चौराहा, कालूकुआं में अवैध टैक्सी स्टैंड आबाद हैं। ट्रैफिक व्यवस्था ध्वस्त करने के बदले हर माह वसूली जाने वाली रकम का वर्दीधारियों और स्टैंड चलाने वालों के बीच बंटवारा होता है।

शहरों में व्यस्ततम इलाकों में ट्रैफिक सिपाहियों को लगाया है। पुलिस अधीक्षक पर निर्भर है कि वे ट्रैफिक में कितने स्टाफ की तैनाती करते हैं। स्टाफ की कमी के चलते सभी प्वाइंटों पर ट्रैफिक सिपाही की तैनाती संभव नहीं है। होमगार्ड जवानों को भी लगाया जाता है। पुलिस चौकियों के सिपाही भी ट्रैफिक पर नजर रखते हैं।
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    ज्ञानेश्वर तिवारी,  डीआईजी, चित्रकूटधाम मंडल

                       
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