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ट्रैफिक व्यवस्था भगवान भरोसे, हर दूसरे दिन हादसे में एक राहगीर की मौत

Tue, 10 Feb 2015 11:50 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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‘डेंजर’ प्वाइटों पर यातायात व्यवस्था राम भरोसे है। शहर के 24 प्वाइंटों पर न तो कोई संकेतक हैं और न ही ट्रैफिक पुलिस। आंकड़े बताते हैं कि इस जनवरी से अब तक मार्ग हादसों में 20 लोग जान गवां चुके हैं। 
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जिले में ट्रैफिक प्वाउंट के हिसाब से ट्रैफिक सिपाहियों व दरोगा की तैनाती नहीं है। मुख्यालय में ट्रैफिक के 11 कांस्टेबल व एक टीएसआई तैनात हैं। इसमें भी कभी घटते या बढ़ते रहते हैं। यहां 24 ट्रैफिक प्वाउंट चिह्नित किए गए हैं। इन व्यस्ततम चौराहों पर कभी-कभार होमगार्ड या पीआरडी जवान बेतरतीब चल रहे वाहनों को संभालने की कोशिश करते दिखते हैं।

ट्रैफिक सिपाही व टीएसआई वहीं नजर आते हैं जहां से प्रशासनिक व पुलिस अफसरों के गुजरने के रास्ते हैं। नतीजे में यहां लोगों को जाम से जूझना पड़ता है। उधर पुलिस क्षेत्राधिकारी नगर, विनोद सिंह ने इस संबंध में कहा कि जाम व हादसों के लिए अतिक्रमण ज्यादा जिम्मेदार है।
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स्टाफ की कमी के चलते सभी प्वाइंटों पर ट्रैफिक सिपाही की तैनाती संभव नहीं है। होमगार्ड जवानों को लगाया जाता है। पुलिस चौकियों के सिपाही भी जाम पर निगाह रखते हैं।

जनवरी के पहले ही दिन भूरागढ़ के नजदीक हाइवे पर बोलेरो से जा रहे खटौरा (अतर्रा) निवासी गोरेलाल (35) पुत्र दीपू की ट्रक की टक्कर से मौत हो गई। उसका साथी बब्बू (25) घायल हो गया। भूरागढ़े के आसपास ही अलग-अलग दिन छह हादसे हुए। इसमें नौ मौतें हुईं।

उधर, मवई व तिंदवारी बाईपास में भी एक महिला समेत चार जान गईं। शहर में प्रैटिक्टल देने आए पिंडखर (बबेरू) गांव निवासी जितेंद्र (20) की तिंदवारी रोड पर हादसे में मौत हो गई। जनवरी में ही महोखर निवासी बउवा की मंडी समिति के पास मौत हुई। इस तरह जनवरी से 10 फरवरी तक सड़क हादसों में 20 से ज्यादा मौतें हुईं। करीब 100 से ज्यादा गंभीर घायल हुए।
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