बांदा। हेलमेट लगाएं, जीवन बचाएं। अमर उजाला की इस मुहिम में शिक्षण संस्थाओं के बाद अब स्वयंसेवी संस्थाएं भी जुडने लगीं।
एक
स्वैच्छिक संगठन के बैनर तले बच्चों ने हाथों में प्रेरित स्लोगन लिखीं
तख्तियां लेकर रैली निकाली। राहगीरों को उनके आश्रित परिजनों की याद दिलाकर
हेलमेट लगाकर दुपहिया वाहन चलाने का संकल्प दिलाया।
गुरुवार को
अल्फिजा महिला सेवा संस्थान (अलीगंज) के बैनर तले गरीब बच्चों ने तख्तियां
लेकर बाबूलाल चौराहे में रैली निकाली। दोपहिया वाहन चालकों को हेलमेट लगाने
के लिए प्रेरित किया।
संस्था संचालक रूबी जैनब ने वाहन चालकों से
कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में दोपहिया वाहनों की संख्या सबसे ज्यादा है।
इनमें ज्यादातर मौतें बिना हेलमेट वाहन चलाने वालों की हुईं।
जानकारी
दी कि हेलमेट लगाने से हेडइंजरी से बचा जा सकता है। इससे जीवन सुरक्षित
रहेगा। उधर, रैली में शामिल बच्चों ने कुछ बाइक सवारों के आगे हाथ जोड़कर
अनुरोध किया कि-आपके बच्चे घर पर इंतजार कर रहे हैं।
उनकी खुशहाली
के लिए हेलमेट जरूर लगाएं। उनकी इस मासूमियत पर पसीजे लगभग 13 राहगीरों ने
बिना हेलमेट वाहन न चलाने का संकल्प लिया। इनमें दिलीप कुमार, संजीव
अग्रवाल, अनिल गुप्ता, प्रदीप धुरिया, प्रसन्न कुमार, रवि पांडेय आदि शामिल
हैं। रैली में महक, अयान, हिना, अल्ताफ, फिजा, निशा, समा, मनीषा, मम्मो,
शबनम अंसारी, फिरदौस, नाजनीन, नफीसा आदि मौजूद रहीं।
समाजसेवी
सूर्यपाल सिंह चौहान (कानाखेड़ा) ने ‘अमर उजाला’ की मुहिम की सराहना की।
बताया कि वर्ष 2011 में करहइया मोड़ के पास बाइक दुर्घटना में अपने 23
वर्षीय पुत्र अजीत सिंह चौहान को गंवा चुके हैं।
वह जेएन
महाविद्यालय में बीए तृतीय वर्ष का छात्र था। बिना हेलमेट के बाइक पर जाते
समय ट्रक की टक्कर से हेड इंजरी से उसकी मौत हो गई थी।
हेलमेट लगाए
होता तो शायद पुत्र की जान बच जाती। उन्होंने कहा कि बाइक चलाने वाले हर
हाल में हेलमेट लगाएं। जीवन अमूल्य है। बाइक चला रहे युवक हेलमेट को अपनी
शान बनाएं। जिससे उनके घर-परिवार को हादसे का दुख न सहना पड़े।