बांदा। मंडल मुख्यालय से चंद कदम दूर तिंदवारा गांव
में डेंगू, टाइफाइड और मलेरिया बीमारियों ने पांव पसार लिए हैं। हर दूसरे
घर में एक-दो मरीज कराह रहे हैं। सूचना के बावजूद गांव में स्वास्थ्य टीम
नहीं पहुंची। लोग झोलाछाप डाक्टरों से इलाज कराने को मजबूर हैं।
तिंदवारा
के ग्रामीणों ने सीएमओ को दी अर्जी में स्वास्थ्य टीम भेजकर जांच व इलाज
कराने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि जांच में गांव के गोविंद मिश्र
पुत्र मुन्ना मिश्रा डेंगू होने पर उसे कानपुर रेफर किया गया है। गांव में
ज्यादातर लोग बुखार से ग्रस्त हैं।
पवन शुक्ला, डॉ. धरम सिंह,
राजेश त्रिवेदी, रविकरन गुप्त, बनवारीलाल, शुभम तिवारी, राकेश सोनी, विकास
यादव, राजू मिश्रा, दीपक तिवारी मौजूद रहे।
मलेरिया और वायरल बुखार
से पीड़ित मरीजों से 15 बिस्तर वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र समेत
प्राइवेट क्लीनिक फुल हैं। उमस भरी गर्मी और रात में ठंड के एहसास ने
बीमारियों में इजाफा कर दिया है। मच्छरों की भरमार से लोग वायरल फीवर व
मलेरिया की गिरफ्त में आ रहे हैं।
गुरुवार को सीएचसी में इलाज
कराने आए मलेरिया से पीड़ित खुशबू (13) व रेशमा (22) महोतरा, सुरेश कुमार
(22) महुटा, रामसूरत (28) पल्हरी, संगीता (18) सिविल लाइन (अतर्रा) ने
बताया कि गांवों में ज्यादातर लोग बुखार की चपेट में हैं।
जांच व
इलाज के नाम पर प्राइवेट डाक्टर मरीजों से दोगुना कीमत वसूल रहे हैं।
सीएचसी प्रभारी डा. वीके श्रीवास्तव ने कहा कि इस समय करीब 600 मरीज
मलेरिया व वायरल फीवर के आ रहे हैं।