स्कूलों मेें बच्चों को मिलने वाला मुफ्त दूध अब मिडडे मील के साथ नहीं बल्कि सुबह स्कूल खुलते ही मिलेगा। इसी तरह कोफ्ता बनाने के लिए लौकी की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। अब किसी भी मौसमी सब्जी से कोफ्ता बनाया जा सकेगा। शासन का आदेश मिलते ही बीएसए ने खंड शिक्षा अधिकारियों को इसके क्रियान्वयन के निर्देश दिए हैं।
प्रदेश सरकार 15 जुलाई से परिषदीय स्कूलों में हर हफ्ते बुधवार को प्रत्येक बच्चे को 200 मिली लीटर दूध और कोफ्ता के साथ सब्जी-चावल देना शुरू किया है। यह दूध दोपहर को मिडडे मील के समय दिया जा रहा था। शासन ने इसमें संशोधन किया है।
अब दोपहर की जगह स्कूल खुलने पर ही बच्चों को दूध वितरित किया जाएगा। इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि दोपहर तक दूध खराब होने की आशंका रहती है। उधर, ज्यादातर परिषदीय स्कूलों में एमडीएम में बच्चों को दूध देने की योजना एक पखवारा भी नहीं चल पाई।
शहर क्षेत्र के स्कूलों को छोड़ तमाम गांव-देहातों में बच्चों को दूध नहीं मिला। शिक्षकों का कहना है कि शासन ने अभी तक बजट की व्यवस्था नहीं की। ऐसे में वह कितने दिन अपनी जेब से दूध पिलाएंगे। उधर, शहर में तो टीचर किसी तरह पैकेट बंद दूध से व्यवस्था कर ले रहे हैं, लेकिन गांवों में दिक्कतें आ रही हैं। दूधिए सप्ताह में सिर्फ एक दिन बुधवार को ही दूध देने को तैयार नहीं हैं।