ओला, बारिश से चौपट होने के बाद खेतों में बची-खुची फसल में किसान अपने पेट भरने का अनाज तलाश रहे हैं। तंगहाली में मड़ाई ट्रैक्टराें के बजाए बैलों से कराई जा रही है। पुकारी गांव में किसान चुनूबाद अहिरवार ने पट्टे की ढाई बीघा जमीन में अरहर बोई थी।
इसके अलावा उसने 8 बीघा बटाई पर ली जमीन में गेहूं और चना बोया था। बारिश और ओलावृष्टि से चुनूबाद की काफी फसल बर्बाद हो गई। उन्होंने बताया कि ट्रैक्टर वाले छह से आठ सौ रुपये प्रति घंटा मड़ाई का लेते हैं। इतनी की तो फसल भी नहीं बची है।
ऐसे में पुरानी पद्धति बैलों से फसल को रौंदवाकर मड़ाई की जा रही है। पूर्व में इसी तरह से मड़ाई होती थी। ट्रैक्टरों का चलन होने के बाद यह लगभग खत्म हो गई है।