गंगऊ और बरियारपुर बांधों का पानी दो दिन का सफर तय करके यहां केन नदी तक पहुंच गया। नतीजे में 24 घंटे के दौरान केन नदी में बाढ़ आ गई। नदी का पानी 3 मीटर ऊपर चढ़ गया है। आसपास के तट और चट्टानें डूब गई हैं। उधर, 24 घंटे में बारिश न होने से बांधों के उफनाने से राहत मिली है। यहां का पानी डेढ़ से दो फीट कम हो गया है।
रविवार को गंगऊ बांध का जलस्तर 735.4 और बरियारपुर का पैमाना 608.8 फीट था। गंगऊ से 32,000 और बरियारपुर से 21,021 क्यूसेक पानी केन नदी में छूट रहा था। लगभग 300 किलोमीटर की दूरी तय करके यह पानी रविवार की रात बांदा मुख्यालय के नजदीक बह रही केन नदी तक आ गया।
नतीजे में नदी का जलस्तर लगभग तीन मीटर बढ़ गया है। रविवार को केन नदी का जल स्तर 93.84 मीटर था। सोमवार को यह बढ़कर 96.55 मीटर हो गया। केन के पानी ने यमुना का जलस्तर भी बढ़ाना शुरू कर दिया है। चिल्ला घाट पर यमुना नदी का जलस्तर रविवार को 85.29 मीटर था।
सोमवार को यह 85.41 मीटर हो गया। दोनों ही नदियां फिलहाल खतरे के निशान से काफी नीचे हैं। केन का लाल निशान 104 मीटर और यमुना का खतरे का निशान 100 मीटर पर है। उधर, बांधों में जल स्तर घटने और 24 घंटे से बारिश न होने पर आने वाले दिनों में नदी का जल स्तर घटने के आसार हैं।
सोमवार को बरियारपुर बांध का जलस्तर 608.8 फीट हो गया। लगभग सवा फीट की कमी आई। पानी का डिस्चार्ज भी 21,000 से घटकर 9528 क्यूसेक हो गया। गंगऊ के जलस्तर में करीब एक फीट की कमी आई। यह 735.4 से घटकर 734.6 फीट पर आ गया।
इससे गिर रहा पानी 32,000 से घटकर 16,300 क्यूसिक हो गया है। उधर, रनगवां बांध के जल स्तर में एक फीट का इजाफा हुआ है। यह 722 से बढ़कर 723 फीट हो गया है। केंद्रीय जल आयोग (बाढ़ पूर्वानुमान विभाग) के स्थानीय कार्यालय के मुताबिक सोमवार की शाम से केन नदी का जलस्तर घटने लगा है। अलबत्ता यमुना नदी का जलस्तर बढ़ रहा है।