बांदा। करोड़ों खर्च के बाद भी ग्रामीण पेयजल परियोजनाएं लोगों की प्यास नही बुझा पा रहीं। ग्राम पंचायतों को हैंडओवर 43 परियोजनाओ में पांच आंशिक व तीन पूर्ण रूप से बंद पड़ी हैं। इनसे जुड़े 52 गांवों और 86 मजरों की कई हजार आबादी पेयजल संकट से जूझ रही है।
इन परियोजनाओं को चालू कराने के लिए 2.33 करोड़ रुपये की दरकार है। ग्राम पंचायतों ने बजट न होने की बात कहकर हाथ खड़े कर दिए हैं। शासन को एस्टीमेट भेजा गया है।
पंचायती राज विभाग को हैंडओवर उक्त परियोजनाओं में बिसंडा ब्लाक में पारा, बड़ोखर में डिंगवाही, बबेरू में टोलाकलां (आंशिक) व बड़ागांव, अहार और मिलाथू बंद हैं। इनका रखरखाव/मरम्मत ग्राम पंचायत के राज्य वित्त आयोग/14वां वित्त आयोग से कराया जाता है लेकिन मौजूदा समय में ग्राम पंचायतों के पास इस मद में इतना पैसा नहीं है कि पेयजल परियोजनाओं को चालू कराया जा सकें।
परियोजनाओं को चालू कराने के लिए 2 करोड़ 33 लाख से अधिक धनराशि की जरूरत है। जिला पंचायत राज अधिकारी संजय यादव ने बताया कि परियोजनाओं की मरम्मत के लिए जल निगम 16वीं शाखा ने एस्टीमेट तैयार कर शासन को भेजा है। बजट आने पर इन्हें पूर्ण क्षमता से चालू कराया जाएगा। पारा, डिंगवाही व टोलाकलां परियोजनाओं को ग्राम पंचायत द्वारा आंशिक रूप से संचालित किया जा रहा है।