बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के नए फरमान से सातों जनपदों के हजारों प्राइवेट स्नातक छात्र-छात्राएं में रोष पनप उठा है। ऐन मौके पर उठाए गए इस कदम से बड़ी संख्या में प्राइवेट छात्र-छात्राएं परीक्षा फार्म भरने के लिए भटक रहे हैं।
इस वर्ष बुंदेलखंड विश्वविद्यालय ने बुंदेलखंड के सभी सातों जनपदों में प्रथम वर्ष के व्यक्तिगत परीक्षार्थियों को स्व वित्त पोषित महाविद्यालयाें में परीक्षा फार्म न भराने का निर्णय लिया है। नतीजे मेें बीए और एमए प्रथम वर्ष के हजारों छात्र-छात्राएं फार्म भरने के लिए परेशान भटक रहे हैं।
छात्र-छात्राओं को कहना है कि यह तुगलकी निर्णय ऐन मौके पर लिया गया। पहले से जानकारी नहीं दी गई ताकि परीक्षार्थी कुछ अन्य उपाए कर पाते। छात्र-छात्राओं ने इस पर कड़ा रोष जताते हुए कहा कि इस निर्णय की जानकारी महाविद्यालयों को पूर्व में नहीं दी गई। न ही उनकी राय ली गई। यह छात्र-छात्राओं के साथ छलावा है।
छात्र-छात्राओं ने कहा कि शैक्षिक क्षेत्र में पहले से ही अति पिछड़े बुंदेलखंड में इस निर्णय का परिणाम दूरगामी होगा। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं स्नातक और परास्नातक योग्यता से वंचित रहे जाएंगे। उन्हें अच्छी नौकरी नहीं मिलेगी। उच्च शिक्षा के लाभ से महरूम रहेंगे क्योंकि सरकारी और वित्त पोषित महाविद्यालयों में स्नातक व परास्नातक कक्षाओं की सीटों में इंटरमीडिएट के परीक्षा परिणाम के सापेक्ष वृद्धि नहीं की गई है।
छात्र-छात्राओं ने सवाल किया है कि अगर विश्वविद्यालय को स्ववित्त पोषित महाविद्यालयों की परीक्षा प्रणाली पर भरोसा नहीं है तो ऐसे महाविद्यालयों की अपने यहां संस्थागत परीक्षा कैसे कराएंगे? उनकी परीक्षा की सुचिता क्या होगी?
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के डिप्टी रजिस्ट्रार (परीक्षा) पीएन प्रसाद ने इस संबंध में कहा, पिछले वर्ष एडेड कॉलेजों में ही छात्र-छात्राएं पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं हो पाए इसलिए इस वर्ष स्ववित्त पोषित महाविद्यालयों को विश्वविद्यालय परीक्षा आवेदन अग्रसारण केंद्र बनाने की आवश्यकता नहीं समझी गई। यह निर्णय परीक्षा समिति का है।