हथौरा में इज्तिमा के समापन पर मांगी जा रही सामूहिक दुआ का नजारा।
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बांदा। आसमान की तरफ उठे लाखों हाथ और आंखों में आंसुओं के बीच मांगी गई सामूहिक दुआ के साथ दो दिनी तब्लीगी इज्तिमा खत्म हो गया। मुल्क की तरक्की और सलामती की भी दुआ की गई। चार जोड़ों के निकाह पढ़ाए गए। विभिन्न जिलों के लिए 1500 जमातें रवाना हुईं। यहां से करीब 15 किलोमीटर दूर विश्व विख्यात मदरसा जामिया अरबिया हथौरा के ग्राउंड मेें नौ जिले का तब्लीगी इज्तिमा शनिवार को सुबह शुरू हुआ था। कई उलमा और मुफ्तियों ने तकरीरें कीं। देर रात तक यह सिलसिला चला। शनिवार को दूसरे और आखिरी दिन सुबह फजिर की नमाज के बाद मुख्य बयान मौलाना किफायत उल्ला (अंबेडकर नगर) का हुआ। इनके अलावा हाजी अब्दुल सत्तार (आगरा) और मौलाना एहतेशाम (सहारनपुर) ने भी बयान किया।
खचाखच भरे पांडाल और दूर-दूर तक बाहर बैठे लोगों को संबोधित करते हुए मौलानाओं ने कहा कि सहाबा (हजरत मोहम्मद के साथी) सारी दुनिया के इंसानों और इंसानियत के लिए दुआ करते थे। हमेें भी अपना रवैया हर शख्स के साथ रहमदिली और खुश अखलाक का रखना चाहिए। जिंदगी में दीन नहीं तो सब कुछ बेकार। सुबह 10:30 बजे दुआ शुरू हो गई। लाखों हाथ आसमान की तरफ उठ गए। मौलाना किफायतुल्ला ने 30 मिनट तक दुआ की। दुआ इतने भावुक अंदाज में कराई गई कि हजारों लोग रो पड़े।
इनके अलावा हरेक की आंख नम हो गई। दुआ से पहले इज्तिमा के मंच पर चार जोड़ों के निकाह पढ़ाए गए। इनमेें तीन बांदा के और एक कानपुर का था। हथौरा मदरसा संचालक हाफिज कारी मौलाना हबीब अहमद ने निकाह पढ़ाया। हाफिज मुफ्ती मौलाना नजीब अहमद कासिमी भी शामिल रहे। इज्तिमा में नई जमातें भी तश्कील (गठित) हुईं। इनकी संख्या लगभग 1500 बताई गईं। दुआ के बाद सारा हुजूम बेहद अनुशासित और खामोश ढंग से अपने-अपने शहरों और जिलों को कूच कर गया। हजारों की संख्या में छोटे-बड़े वाहनों से लोग आए थे। ट्रेनों से भी भारी तादाद में जमाती लोग आए।
नेताओं ने भी लगाई हाजिरी
बांदा। तब्लीगी इज्तिमाओं में सियासी बातों और गतिविधियों से पूरी तरह परहेज किया जाता है। जमातों के जिम्मेदार यह हरगिज पसंद नहीं करते लेकिन नेताओं की मजबूरी है कि जहां भारी हुजूम हो वहां उन्हें जाना ही है। हालांकि कुछ सियासी लोग सांप्रदायिक सौहार्द को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भी ऐसे मौकों पर शरीक होते हैं। हथौरा के इज्तिमा में क्षेत्रीय कांग्रेस विधायक दलजीत सिंह भी पहुंचे। उनके साथ जिला कांग्रेस अध्यक्ष अखिलेश शुक्ल भी थे। इसी क्षेत्र से बसपा प्रत्याशी जगदीश प्रजापति और सपा प्रत्याशी दीपा सिंह गौर के पति अशोक सिंह गौर ने भी हाजिरी दी। सपा जिलाध्यक्ष शमीम बांदवी भी शरीक रहे। ईदगाह व जामा मस्जिद मुतवल्ली शेख सादी जमां, बसपा मंडल कोआर्डिनेटर मोहम्मद इदरीस, हाजी शब्बीर अली बबलू, हाजी मोहम्मद शाकिर, हाजी महफूजुर्रहमान इत्यादि ने भी इज्तिमा के कामों में हाथ बंटाया।
इज्तिमा स्थल में बाजार न सजे
बांदा। मदरसा जामा अरबिया, हथौरा के मुदर्रिस और मजलिसे अहरार के सदर (अध्यक्ष) मौलाना गयासुद्दीन धामपुरी ने इज्तिमा की कामयाबी और इंतजामों पर खुशी जताई। साथ ही यह भी कहा कि इज्तिमा के आसपास से खाने-पीने जैसे जरूरी चीजों के अलावा किसी भी चीज की दुकान नहीं होनी चाहिए। इज्तिमा के जिम्मेदार इसकी इजाजत नहीं देते। इसके बावजूद तमाम सामान की दुकानें सज जाती हैं। बड़ी तादाद में लोग इज्तिमा छोड़कर इन दुकानों में अपना वक्त जाया करते हैं। यह हरगिज मुनासिब नहीं। दुकानों पर सख्ती से रोक लगे।