मंडलीय अस्पताल का आईसीयू वार्ड।
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बांदा। कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के भले ही स्वास्थ्य विभाग तैयारी पूरी होने का दावा कर रहा है, पर असलियत कुछ और है। राजकीय मेडिकल कालेज और सीएचसी के अलावा जिला अस्पताल में भी स्टाफ का भारी टोटा है। 200 बेड के मंडलीय अस्पताल में बच्चों के लिए 78 और वयस्कों के लिए 59 बेड (कुल 137 बेड) के आईसीयू/आइसोलेशन वार्ड बनाए गए हैं। लेकिन पैरामेडिकल और स्वीपर के अधिकांश पद खाली हैं। स्वीकृत पदों के सापेक्ष मात्र 12 फीसदी स्वास्थ्य कर्मी ही कार्यरत हैं।
जिला अस्पताल परिसर में ही मंडलीय चिकित्सालय है। कोरोना की चपेट में आने वाले बच्चों के लिए यहां 78 बेड का पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीकू) बनाया गया है। इनमें आईसीयू में 11, एचडीयू (हाई डिपेंडेंसी यूनिट) में 32 और आइसोलेशन वार्ड में 35 बेड आरक्षित हैं। वयस्कों के लिए आरक्षित वार्डों में आईसीयू और ओमिक्रॉन में 10-10 बेड हैं। 39 बेड का आइसोलेशन वार्ड अलग है।
कोविड से निपटने की इन सारी तैयारियों पर स्टाफ की कमी पानी फेर रही है। अस्पताल प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक पैरामेडिकल स्टाफ के 40 पदों में मात्र 5 भरे हैं। स्वीपर के सभी 10 पद खाली हैं। इसके अलावा फार्मासिस्ट के 4 में 3, वार्ड ब्वाय के 10 में 8, वार्ड आया के 10 में 9 और स्टाफ नर्स के 6 में 5 पद रिक्त हैं। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा.एसएन मिश्र ने बताया कि कोरोना के मद्देनजर स्टाफ बढ़ाने के लिए शासन से मांग की गई है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं (लखनऊ) महानिदेशक को पत्र भेजा है।