बांदा। बुंदेलखंड जैसे शुष्क क्षेत्रों में कृषि को लाभकारी बनाने के लिए हमें कृषि की नई तकनीकियों को अपनाना होगा। इस क्षेत्र में संरक्षित खेती की अपार संभावनाएं हैं।
कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय पूर्व वार्षिक क्षेत्रीय कार्यशाला में कुलपति डाॅ. एनपी सिंह ने कृषि विज्ञान केंद्रों के अध्यक्षों को सुझाव दिया की वे अपने प्रस्तुतिकरण में टेंपलेट तैयार कर केवीके तकनीकी कार्यक्रम प्रस्तुत करें। प्रस्तुतिकरण बनाते समय पीपीटी में कम शब्द रखें व ज्यादा से ज्यादा तालिका, चार्ट व फोटो के माध्यम से बात कहें।
निदेशक प्रसार, डाॅ. एन. के बाजपेयी ने कार्यशाला के उद्देश्यों की जानकारी दी। कहा कि केवीके बांदा, महोबा, हमीरपुर, जालौन, झांसी, ललितपुर, प्रयागराज व चित्रकूट के कार्यों की समीक्षा करना है। बताया केवीके बहुद्देशीय योजना है। हाईटेक नर्सरी व श्री अन्न उत्पादन व प्रसंस्करण को बढ़ावा देती है।
कुलपति ने अजीत निगम के केवीके बीयूएटी ऑनलाइन लीव पोर्टल की शुरुआत की। कृषि महाविद्यालय डाॅ. जी. एस पवार, अधिष्ठाता उद्यान ङाॅ. एसवी द्विवेदी, अधिष्ठाता वानिकी डाॅ. संजीव कुमार, निदेशक शोध डाॅ. एसी. मिश्रा, विभागाध्यक्ष डाॅ. भानूप्रकाश मिश्रा, सह निदेशक प्रसार डा. नरेन्द्र सिंह सहित जन संपर्क अधिकारी बीके गुप्ता आदि मौजूद रहे।