बांदा। जैन समाज के पर्यूषण पर्व के अंतिम दिन क्षमा वाणी कार्यक्रम धूमधाम से मनाया गया। इसमें क्षमता का महत्व बताया।
छोटी बाजार स्थित जैन चैत्यालय में पंडित चितरंजन ने प्रवचन में कहा कि क्षमा करने से संस्कार बनते हैं और व्यक्ति हमेशा प्रसन्नचित रहता है। क्षमा आत्मा का धर्म है, इसलिए जो मानव अपना कल्याण चाहते हैं, उन्हें हमेशा इस भावना की रक्षा करनी चाहिए। क्षमावान मनुष्य का इस लोक और परलोक में कोई शत्रु नहीं होता है। क्षमा ही सर्व धर्म का सार है।
पंडित सुरेंद्र कुमार जैन ने कहा कि जिसके ह्रदय में अहंकार है वह दुखी है और जिसने अपने अहंकार को विसर्जित किया, मात्र वही सुखी है। कार्यक्रम में समाज सेवा में अग्रणी रहे लोगो में भूपत जैन को कर्मवीर एवं मुकेश जैन को गुरु भक्त की उपाधि से अलंकृत किया गया। इस अवसर पर समाज के लोगों ने आपस में एक-दूसरे से जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगी।