बाजे-गाजे के बीच निकाली गई शोभायात्रा के बाद केन
नदी में गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। इसी के साथ 10 दिवसीय गणेश
पूजा महोत्सव खत्म हो गया।
‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी
आ’ के नारे शहर की सड़कों और नदी तट पर देर शाम तक गूंजते रहे। छिटपुट
घटनाओं के अलावा सब कुछ शांतिपूर्वक निपटा। कस्बों में भी पूजा महोत्सव का
समापन हुआ।
रविवार को सुबह से ही गणेश पूजा पंडालों में स्थापित
प्रतिमाओं को ट्रैक्टर ट्राली पर झांकी के रूप में सजाया गया। दोपहर को 36
प्रतिमाएं अलग-अलग जत्थों में बाजे-गाजे और डीजे के साथ महेश्वरी देवी
मंदिर के पास पहुंचीं। प्रतिमाओं का काफिला केन नदी के लिए रवाना हुआ।
शोभायात्रा
में अबीर और गुलाल भी खूब उड़ा। कई स्थानों पर स्वागत हुआ। पूजा पंडाल
आयोजन समितियों को ईनाम दिए गए। नगर पालिका चेयरमैन विनोद जैन ने भी मंच पर
समितियों का सम्मानित किया।
केंद्रीय गणेश पूजा महोत्सव समिति
अध्यक्ष राम प्रसाद सोनी, महामंत्री चंद्रशेखर रावत, संरक्षक अरविंद
त्रिपाठी, शिव प्रसाद अवस्थी, अशोक त्रिपाठी जीतू, राज कुमार शिवहरे, कल्लू
राजपूत, विष्णु गुप्ता, देवेंद्र प्रताप सिंह भी शामिल रहे।
उधर,
घरों में स्थापित की गई 43 छोटी प्रतिमाओं को भी उनके स्थापक परिवार वाहनों
पर केन नदी ले गए। प्रतिमाओं को नावों पर नदी की जलधारा में विसर्जित किया
गया।
तमाम श्रद्धालुआें की आंखों में गजानन की विदाई पर आंसू आ
गए। ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के स्वर गूंजते रहे। प्रशासन
ने प्रतिमा जुलूस और प्रमुख स्थानों तथा केन नदी घाट में सुरक्षा तथा अन्य
व्यवस्थाएं की थीं। बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी और जवान तैनात रहे।
बबेरू
के मढ़ीदाई और अद्भुत शिव मंदिर के पास स्थापित गणेश प्रतिमाओं को
हवन-पूजन के बाद गाजे-बाजे के बीच विसर्जन के लिए ले जाया गया।
अतर्रा
प्रतिनिधि के मुताबिक कस्बे में गणेश महोत्सव के समापन पर रविवार को
धूमधाम से विसर्जन जुलूस निकाला गया। ब्रह्मनगर मोहल्ले में युवाओं द्वारा
सजाई श्रीगणेश की भव्य प्रतिमा आकर्षण का केंद्र रही। प्रियांश,
प्राज्ज्वल, राहुल, जीतू, आभा, अमन आदि ने आपसी सहयोग से इस वर्ष पंडाल
सजाया।